प्रदेश के सभी सहकारी बैंकों में पहली बार नए इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत बड़े वित्तीय लेनदेन और खातों की डिटेल आयकर विभाग को भेजी जाएगी। राज्य के करीब 29 सहकारी बैंकों से जुड़े सवा करोड़ खाताधारक इससे सीधे दायरे में आ रहे हैं। आयकर विभाग में पहली बार नई धाराओं-फॉर्म 97, 98 और 165-ए के तहत बैंकों को यह डेटा 31 अक्टूबर तक उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। इसी कड़ी में पहली बार गैर पैन धारक खाताधारकों की सूची तैयार होने जा रही है। गौरतलब है कि आयकर विभाग की धारा 10(1) के तहत कृषि से होने वाली आय पर पूरी तरह से छूट रहती है। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में गैर पैन के खाताधारक बड़ी संख्या में है। प्रदेश में कुल खाताधारक करीब सवा करोड़ हैं। आगे क्या : विभाग इस मामले में पड़ताल करेगा। पड़ताल के बाद लगता है कि आयकर चुकाने का केस बनता है तो नोटिस जारी करके आयकर चुकाने की मांग करेगा। इन खातों व लेन-देन की डिटेल लेंगे फिक्स डिपॉजिट: जिन खातों में एक साल के दौरान 10 लाख या इससे अधिक की एफडी हुई है। करंट अकाउंट: जिन चालू खातों में 50 लाख रुपए या इससे अधिक की राशि या लेनदेन हुआ है। सेविंग, ज्वाइंट और ओडी अकाउंट: बचत, संयुक्त और ओवरड्राफ्ट (खातों में 10 लाख रुपए या इससे अधिक की राशि जमा है या लेनदेन हैं। डेडलाइन और जुर्माने का प्रावधान बैंकों के लिए यह जानकारी साझा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तय की गई है। तय समयसीमा में जानकारी न देने या लापरवाही बरतने पर कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। देरी होने पर: जानकारी देने में विलंब होने पर ₹500 रु. प्रति दिन का जुर्माना लगेगा। गलती होने पर: विवरण में किसी भी प्रकार की गलती या त्रुटि पाए जाने पर ₹50,000 रु. तक का जुर्माना वसूला जाएगा। क्या पहले भी दी जाती थी जानकारी? इससे पहले सहकारी बैंक इनकम टैक्स की धारा फॉर्म 61ए के तहत विवरण देते रहे हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब बैंक इनकम टैक्स की नई धाराओं फॉर्म 97, 98 और 165-के तहत पहली बार यह ब्योरा साझा होगा।