DNA जांच किट खरीद में गड़बड़ी के मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा समेत 4 अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गृह विभाग ने चारों अधिकारियों के खिलाफ 17 (ए) (पद का दुरुपयोग) के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी है। गृहराज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कार्रवाई का अप्रूवल दे दिया है। सरकार ने मामले में FSL के डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा, सिरोलॉजी डीएनए विभाग के सहायक निदेशक डॉ. आनंद कुमार, सहायक निदेशक डॉ. भावना पूनिया और सिरोलॉजी सेक्शन के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रामकिशन कुमावत को 13 अप्रैल को एपीओ कर दिया था। भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी जांच की मंजूरी देने वाले कार्मिक विभाग ने माना है कि प्राथमिक जांच में सामने आया है- आरोप सही हैं। एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा- गड़बड़ी हुई है। अभी हम परीक्षण कर रहे हैं। जांच में थोड़ा समय लग सकता है। इस तरह हुआ था खुलासा मामला 2 साल पहले 22 मई 2024 को एक ई-फाइल के जरिए राज्य सरकार की नजर में आया था। उस समय डॉ. रमेश चौधरी को स्टोर प्रभारी का जिम्मा दिया गया था। डॉ. रमेश चौधरी ने अप्रैल-मई, 2023-24 में स्टोर रिकॉर्ड में पाया कि 2023-24 में FSL राजस्थान में एक जैसे DNA जांच किट अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा कीमत पर खरीदे गए। सूत्रों के अनुसार डॉ. चौधरी ने इस वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी FSL के डायरेक्टर को पत्रावलियों के जरिए लिखित में बार-बार दी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। FSL डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा, FSL के सिरोलॉजी DNA विभाग के सहायक निदेशक डॉ. आनंद कुमार, सहायक निदेशक डॉ. भावना पूनिया और सिरोलॉजी सेक्शन के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रामकिशन कुमावत पर DNA किट खरीद गड़बड़ी में भूमिका होने के आरोप लग रहे थे। 8.71 करोड़ का घोटाला आरोप है कि दूसरे राज्यों की तुलना में राजस्थान में 11 गुना तक ज्यादा दरों पर डीएनए जांच किट खरीदी गई थी। कंपनी भी वही, प्रोडक्ट भी वही। फिर भी शिकायतें मिलने पर खरीद नहीं रोकी गई। बताया जा रहा है कि ये घोटाला करीब 8.71 करोड़ रुपए का है। इसके बाद सरकार में उच्च स्तर पर शिकायतें की गई थीं। शिकायतों के बाद अब सरकार ने निदेशक सहित चार बड़े जिम्मेदारों को पद से हटा दिया था। ऐसे होती है 17 ए में कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संशोधन 2018 की धारा 17 ए के तहत अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए एसीबी को उनके विभागाध्यक्षों की स्वीकृति लेनी होती है। इसके लिए कार्मिक विभाग (DOP) या संबंधित प्रशासनिक सचिव इस तरह की जांच के लिए पूर्व अनुमति प्रदान करते हैं। यदि कोई कर्मचारी सरकारी कार्य में भ्रष्टाचार का आरोपी है तो मामला पहले सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाता है, और जब तक 17A के तहत अनुमति नहीं मिलती, तब तक पूछताछ नहीं की जा सकती। राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्मिक विभाग या संबंधित प्रशासनिक सचिव एसीबी जांच की अनुमति प्रदान करते हैं। गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने अफसरों के विरुद्ध 17 (ए) (पद का दुरुपयोग) के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी है। … मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… रेप-मर्डर के राज खोलने वाली किट 11 गुना महंगी खरीदी:क्या यही है FSL डायरेक्टर सहित 4 को पद से हटाने की वजह, जानें क्या बोले जिम्मेदार राज्य सरकार ने एक दिन पहले विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के डायरेक्टर अजय शर्मा समेत 4 अफसरों को पद से हटा दिया। APO के ऑर्डर को लेकर सरकार के आला अधिकारियों ने माना कि इसके पीछे वजह FSL में हुई DNA जांच किट खरीद में गड़बड़ी है, लेकिन ऑफिशियली कोई बोलने को तैयार नहीं है। (पूरी खबर पढ़ें)