अलवर के रूपबास स्थित जगन्नाथ मेले के पांचवें दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही लोगों ने भगवान जगन्नाथ के चतुर्भुज स्वरूप, माता जानकी और सीताराम जी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया। शाम साढ़े 6 बजे भगवान जगन्नाथजी-माता जानकी के साथ रथ पर सवार होकर निकले। उससे पहले मंदिर में पूजन किया गया। इस दौरान हजारों भक्त माता जानकी व भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने को आतुर रहे। उनकी एक झलक पाने के लिए कई किलोमीटर दूर तक भक्त इंतजार करते नजर आए। मंदिर में सुबह मंगला आरती, कीर्तन, मक्खन-मिश्री का भोग और श्रृंगार आरती का आयोजन हुआ। सोमवार शाम साढ़े 6 बजे भगवान जगन्नाथ की बारात रूपबास से सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए रवाना हुई। भगवान जगन्नाथजी इंद्रविमान पर सवार होकर शाही लवाजमे, बैंड-बाजों और आकर्षक झांकियों के साथ नगर भ्रमण करते हुए निकल रहे हैं। रास्ते में आने वाले सभी प्रमुख मंदिरों पर भगवान की पूजा-अर्चना और भव्य स्वागत किया जाएगा। देखे 4 PHOTOS,, भगवान जगन्नाथ को अपना दामाद और माता जानकी को बेटी मानते हैं रूपबास के लोग रूपबास के लोग भगवान जगन्नाथ को अपना दामाद और माता जानकी को बेटी मानते हैं। इसी परंपरा के तहत महिलाओं ने मालपुआ-खीर, दाल-बाटी-चूरमा, हलवा, पकौड़ी, राबड़ी सहित विभिन्न व्यंजन तैयार कर भगवान को भोग लगाया। ग्रामीण श्रद्धालु कढ़ी-कचौरी लेकर पहुंचे, जबकि महिलाओं ने बेटी जानकी के लिए साड़ी और श्रृंगार का सामान भेंट किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरी-सब्जी, छोले-ब्रेड का प्रसाद वितरित किया और श्रद्धालुओं के लिए प्याऊ की व्यवस्था भी की। जगन्नाथ मंदिर के महंत पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे सुभाष चौक स्थित मंदिर में ब्रह्मभोज के साथ जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का विधिवत समापन होगा।