चित्तौड़गढ़ की गंगरार तहसील पर स्थित सारण सेंटर पर गेहूं गायब मिलने के मामले में आखिरकार बुधवार देर रात को FIR दर्ज करवाई गई। एक उचित मूल्य दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का करीब 28 हजार 486 किलो गेहूं गायब मिलने के मामले में आखिरकार बुधवार देर रात को प्रवर्तन निरीक्षक जितेंद्र सैनी ने FIR दर्ज करवाई गई। विभाग की जांच में सामने आया कि पोस मशीन के रिकॉर्ड के अनुसार दुकान पर 28 हजार 911 किलो गेहूं होना चाहिए था, लेकिन मौके पर सिर्फ 425 किलो गेहूं मिला। इसके बाद विभाग ने दुकानदार को लगातार नोटिस भेजे, लाइसेंस भी निरस्त कर दिया और गेहूं की भरपाई का मौका दिया, लेकिन न तो जवाब मिला और न ही गेहूं वापस जमा कराया गया। अब प्रवर्तन निरीक्षक जितेंद्र सैनी की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों में मामला दर्ज कराया गया है। दुकानदार ने अवकाश लेने के लिए आवेदन दिया था पूरा मामला गंगरार तहसील के सारण सेंटर स्थित उचित मूल्य दुकान के संचालक नरेन्द्र कुमार मेनारिया से जुड़ा है। विभाग के अनुसार दुकानदार ने अवकाश लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसके साथ कोई मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं लगाया गया। आवेदन भी खुद दुकानदार ने नहीं बल्कि उसके भाई महेश मेनारिया ने कार्यालय में जमा कराया। इसके बाद विभाग को मामला संदिग्ध लगा। अधिकारियों ने कई बार फोन पर संपर्क कर दुकानदार को भौतिक सत्यापन के लिए बुलाया, लेकिन उसने सहयोग नहीं किया। इसके बाद प्रवर्तन निरीक्षक जितेन्द्र सैनी ने मामले की जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 नवंबर 2024 को नरेन्द्र कुमार मेनारिया को निलंबित कर दिया गया और उसकी जगह अस्थायी रूप से पास की उचित मूल्य दुकान के संचालक जगदीश जाट को वितरण की जिम्मेदारी सौंप दी गई। रिकॉर्ड में 28,911 किलो, मौके पर मिला 425 किलो गेहूं वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने के दौरान दुकान का स्टॉक जांचा गया। 3 दिसंबर 2024 को प्रवर्तन निरीक्षक ने जब दुकान का भौतिक सत्यापन किया तो बड़ा अंतर सामने आया। पोस मशीन में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार उस समय दुकान पर 28 हजार 911 किलो गेहूं मौजूद होना चाहिए था, ताकि पात्र उपभोक्ताओं को उसका वितरण किया जा सके। लेकिन मौके पर सिर्फ 425 किलो गेहूं मिला। यानी 28 हजार 486 किलो गेहूं कम पाया गया। विभाग का कहना है कि यह गेहूं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब और पात्र परिवारों को बांटा जाना था, लेकिन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर मिलने से गबन की आशंका पुख्ता हो गई। लाइसेंस निरस्त के बाद भी जवाब नहीं जांच के बाद जिला रसद कार्यालय ने दुकानदार को अपनी बात रखने और गेहूं की भरपाई करने का पूरा मौका दिया। विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर 19 फरवरी 2025, 30 जून 2025 और 18 दिसंबर 2025 को कुल तीन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों में 28 हजार 486 किलो गेहूं के संबंध में जवाब मांगा गया और स्टॉक की कमी पूरी करने के लिए कहा गया। विभाग के अनुसार नरेन्द्र कुमार मेनारिया ने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही गेहूं वापस जमा कराया। इस बीच विभाग ने उसका प्राधिकरण भी निरस्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद कोई संतोषजनक जवाब या कार्रवाई नहीं हुई। लगातार मौका देने के बाद भी जब न तो कमी पूरी की गई और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया गया, तब विभाग ने कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया। अब दर्ज हुई FIR प्रवर्तन निरीक्षक जितेन्द्र सैनी ने गंगरार थाने में रिपोर्ट देकर नरेन्द्र कुमार मेनारिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुकानदार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले गेहूं का गबन कर उसका निजी उपयोग किया। यह कृत्य राजस्थान खाद्यान्न एवं आवश्यक पदार्थ (वितरण का विनियमन) आदेश 1976, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2011 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का उल्लंघन है। गंगरार थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत ने बताया कि अब मामला दर्ज हो चुका है। मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस गेहूं का रिकॉर्ड में उल्लेख था, वह गरीब और जरूरतमंद परिवारों के राशन के लिए रखा गया सरकारी स्टॉक था।