गाजियाबाद स्थित सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर परिसर में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल मुख्य अतिथि और भाजपा राजस्थान के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने गुरुकुल शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार बताया। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने संस्कारयुक्त शिक्षा के विस्तार पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष महंत नारायण गिरि महाराज ने की। इस अवसर पर देशभर से आए संत-महात्मा, धर्माचार्य, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे। विद्यालय के 25 सालों की यात्रा दिखाई कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। दूधेश्वर वेद विद्यालय के छात्रों ने वैदिक परंपरा और भारतीय संस्कृति पर आधारित स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। एक चलचित्र के माध्यम से स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक की 25 वर्षों की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया। समारोह में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान की रजत जयंती स्मारिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। स्मारिका में संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा, वैदिक शिक्षा के विविध आयाम, संतों के प्रेरक संदेश, छात्रों की उपलब्धियां और संस्थान के विकास का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। मुख्य अतिथि किशन सिंह जसोल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति, ऋषि परंपरा, वैदिक ज्ञान एवं गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में निहित है। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही श्रेष्ठ नागरिक, सुदृढ़ समाज और समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान छात्रों को वेद, शास्त्र एवं संस्कृत के अध्ययन के साथ धर्म, अनुशासन, चरित्र, सेवा, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अपने तप, त्याग, दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत पुरुषार्थ से वैदिक शिक्षा के संरक्षण का जो महायज्ञ प्रारम्भ किया, वो आज विशाल स्वरूप प्राप्त कर चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी देश-विदेश में भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का गौरव बढ़ा रहे हैं। ऐसे गुरुकुल भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशिष्ट अतिथि हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि वैदिक शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान में विद्यार्थियों का शैक्षिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास किया जा रहा है। यहाँ प्राप्त ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज जैसे तपस्वी, दूरदर्शी एवं राष्ट्रचिंतक संतों के मार्गदर्शन से सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान ने वैदिक अध्ययन, संस्कृत संवर्धन, गुरुकुल परंपरा एवं भारतीय जीवन मूल्यों के संरक्षण में अनुकरणीय स्थान स्थापित किया है। यह संस्थान आने वाले समय में भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक विस्तार का सशक्त माध्यम बनेगा। समारोह में आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वेश्वरानन्द गिरि महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज, महामंडलेश्वर चेतना माता, महामण्डलेश्वर स्वामी विद्याचैतन्य महाराज (अंतर्राष्ट्रीय सनातन धर्म संस्थान, नैमिषारण्य), महामंडलेश्वर श्रद्धा माता, जूना अखाड़ा के सचिव एवं दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री महंत कंचन गिरि महाराज, दिल्ली संत महामंडल के कोषाध्यक्ष महंत धीरेंद्र पुरी महाराज, सिद्धेश्वर वेद विद्यालय के संस्थापक महंत मुकेशानन्द गिरि महाराज तथा प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक गुरु पवन सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के सचिव प्रो. विरूपाक्ष वी. जड्डीपाल, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, गाजियाबाद विधायक संजीव शर्मा, शिक्षाविद राम अवतार जिंदल एवं समाजसेवी नवरत्न सोनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए संतों एवं वक्ताओं ने कहा- परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, धर्म, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभावना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, अनुशासन, आचरण एवं संस्कारों के माध्यम से भारतीय गुरुकुल परंपरा की श्रेष्ठता का परिचय दे रहे हैं। इस अवसर पर धर्म, शिक्षा, साहित्य, मीडिया एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक व्यक्तित्वों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पमालाओं से सम्मानित किया गया। इनमें श्री दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग, विनय संकोची, अजय चोपड़ा, श्रृंगार समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल, धर्मेंद्र चौधरी, मंदिर के सोशल मीडिया संयोजक सांवलाराम सुथार, अमित प्रकाश, मीडिया प्रभारी बी.के. शर्मा, अधिवक्ता हर्ष पाण्डेय, लेखा परीक्षक संजीव गुप्ता, नितिन कुमार तथा प्रख्यात कवि राज कौशिक शामिल रहे। समापन अवसर पर परम पूज्य महंत नारायण गिरि महाराज ने देशभर से पधारे संत-महात्माओं, अतिथियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, सहयोगियों, आचार्यगण, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। रजत जयंती समारोह का समापन वैदिक मंगलकामनाओं, संतों के आशीर्वचनों तथा भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा एवं राष्ट्र की उन्नति के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।