राज्यस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिला परिषद जयपुर में वर्ष-2013 की एलडीसी भर्ती तत्कालीन समय के बड़े भर्ती घोटालों में शामिल होती नजर आ रही है। मेरिट निर्धारण संबंधी दस्तावेजों की जांच में जिला स्तर पर केवल 627 कार्मिकों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया, जबकि राज्य स्तर पर 672 कार्मिकों के रिकॉर्ड सामने आए। 45 कार्मिकों का रिकॉर्ड नहीं मिलने से पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 672 कार्मिकों के दस्तावेजों की जांच में 529 अभ्यर्थियों ने संविदा सेवा के अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर बोनस अंक प्राप्त किए। इनमें 250 से अधिक नियुक्तियों में फर्जी डिग्री, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य अनियमितताएं सामने आईं। जांच समिति ने नियमविरुद्ध नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने, फर्जी दस्तावेज देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ एसीबी और एसओजी से जांच कराने की सिफारिश की थी। हालांकि, रिपोर्ट आने के बाद भी इन सिफारिशों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इन राज्यों की डिग्रियों पर सबसे ज्यादा खेल संदिग्ध लिपिकों ने शैक्षणिक और कंप्यूटर योग्यता (पीजीडीसीए/डीसीए) के दस्तावेज राजस्थान से बाहर के राज्यों से हासिल किए। इनमें सबसे अधिक डिग्रियां सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, मध्यप्रदेश (भोपाल) और छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों की हैं। जांच में इन दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होने का भी खुलासा हुआ। तीन दस्तावेजों के आधार पर हुई भर्ती एलडीसी भर्ती-2013 में न लिखित परीक्षा हुई, न साक्षात्कार और न ही टाइप टेस्ट। मेरिट केवल तीन आधारों सीनियर सेकेंडरी अंक, कंप्यूटर योग्यता और अनुभव प्रमाण-पत्र पर तय हुई। अंतिम चयन इन दस्तावेजों के सत्यापन के अधीन था। मेरिट को मारा.. सिस्टम को बेचा, जांच रिपोर्ट में 672 का हिसाब आया सामने 9 साल में 4 आदेश, कार्रवाई अधूरी जांच समिति की 3 सिफारिशें, आज तक अधूरी