भास्कर न्यूज | जैसलमेर जैसलमेर के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र में मानवता को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है। इसने रिश्तों की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज चंद रुपयों और गहनों के लालच में एक पोते ने अपने ही सगे दादा-दादी की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वारदात के महज 6 घंटों के भीतर दोनों आरोपियों को दबोच लिया। वारदात का खुलासा 18 अप्रैल की सुबह उस वक्त हुआ, जब मृतकों का रिश्तेदार चंदाराम अपने मौसा लाखाराम (80) के घर पहुंचा। वहां का मंजर देख उसके होश उड़ गए। लाखाराम आंगन में बेसुध पड़े थे। उनकी पत्नी रेशमा (78) घर के अंदर चारपाई पर मृत पाई गईं। मोहनगढ़ थानाधिकारी, पीटीएम थानाधिकारी प्रेमाराम व एएसआई पदमसिंह, नाचना थाने से एएसआई खीमाराम और डीएसटी प्रभारी भीमरावसिंह के नेतृत्व में कांस्टेबल हजारसिंह, जगदीश, लील गिरी व रमेश की टीम ने 6 घंटों के अंदर पुलिस ने दो आरोपियों को नामजद किया। शहर कोतवाल सुरजाराम के नेतृत्व में टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी वापस जैसलमेर आ गए। योगेश के मामा की बेटी की शादी थी। दोनों उसकी तैयारियों में जुट गए। यहां तक कि लाखाराम की अंतिम यात्रा में भी आरोपी शामिल नहीं हुए। आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ में ही पुलिस को इन पर शक हो गया। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, दोनों की मोबाइल लोकेशन सहित अन्य सबूत जुटाए गए। दोनों पर शक गहराने के बाद उन्हें पकड़ लिया गया। पुलिस पूछताछ में जो सच सामने आया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। मुख्य आरोपी सुरेश, मृतक लाखाराम का रिश्ते में पोता लगता है।आरोपी सुरेश कुछ दिन पहले ही अपने दादा के घर रुका था। उसने बारीकी से रैकी की। उसने देखा कि बुजुर्ग दंपती जेवर और नकदी कहां रखते हैं। आर्थिक स्थिति सुधारने और रातों-रात अमीर बनने के लिए उसने अपने मामा-बुआ के भाई योगेश को साथ मिलाया। वारदात की रात दोनों ने शराब पी। फिर सुनसान रास्ते से ढाणी में घुसे। पहले लाखाराम का गला दबाया। फिर रेशमा का गला दबाया। दोनों को मौत की नींद सुला दिया। पुलिस की विभिन्न टीमों ने आसूचना संकलन और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। तकनीकी आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने संदिग्धों को चिन्हित किया। मोहनगढ़ थानाधिकारी पीटीएम थानाधिकारी प्रेमाराम व एएसआई पदमसिंह, नाचना थाने से एएसआई खीमाराम और डीएसटी प्रभारी भीमरावसिंह के नेतृत्व में कांस्टेबल हजारसिंह, जगदीश, लील गिरी व रमेश की टीम ने आपसी समन्वय कर संदिग्धों की पहचान कर ली। वारदात के सिर्फ 6 घंटों के अंदर पुलिस ने दो आरोपियों को नामजद किया। जिसके बाद शहर कोतवाल सुरजाराम के नेतृत्व में गठित टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुरेश पुत्र मनसुखराम भील निवासी 12 बीएलएम हाल डिग्गा व योगेश पुत्र टीकमराम भील निवासी भील बस्ती जैसलमेर को गिरफ्तार किया। कुछ समय पहले आरोपी सुरेश रिश्ते में दादा लगने वाले लाखाराम के यहां गया। वह वहां रुका भी था। उसे लाखाराम और रेशमा की दिनचर्या की पूरी जानकारी थी। उसे यह भी पता था कि बुजुर्ग दंपती की नकदी व सोने-चांदी के जेवर कहां रखे हैं। इसके बाद उसने योगेश को अपने साथ लिया। दोनों शाम को जैसलमेर से मोहनगढ़ के लिए रवाना हुए। काणोद के पास दोनों ने शराब की दुकान से शराब ली। आगे जाकर सुनसान इलाके में शराब पी। इसके बाद उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल भील बस्ती में पीछे की तरफ जाकर खड़ी कर दी। वे सुनसान रास्ते से ढाणी में आए। वहां उन्होंने पहले लाखाराम का गला दबाया। उसके बाद रेशमा की हत्या कर दी।