राजस्थान में सबसे ज्यादा भूजल दोहन वाली चि​ह्नित पंचायतों में अटल भूजल योजना से पानी बचाने में मदद मिल रही है। प्रदेश के 17 जिलों में यह योजना लागू की गई थी। इनमें अजमेर, अलवर, करौली, कोटा, चित्तौड़गढ़ , राजसमंद, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुनूं, धौलपुर, दौसा, बारां, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, सीकर व हनुमानगढ़ आदि जिलों की 1132 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। हालांकि इस योजना के लिए 1144 ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया था लेकिन लागू 1132 ग्राम पंचायतों में ही किया गया। करीब 18 हजार लोगों को प्रशिक्षित भी गया। अब भारतीय गुणवत्ता परिषद के जरिए आकलन करवाया गया। इस एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में पानी बचाने व पुनर्भरण से 771 ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया है। यह योजना देश के 7 राज्यों राजस्थान, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व कर्नाटक में अप्रैल 2020 में लागू की गई थी। भूजल विभाग को नोडल बनाया गया था। जबकि कृषि, उद्यानिकी, जल संसाधन, जलग्रहण, भू-संरक्षण, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, वन एवं ऊर्जा विभाग के जरिए पंचायतों में लागू किया गया। 17 जिलों की 38 पंचायत समितियों की ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण के कार्य करवाए गए। मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र में कृषि सिंचाई के लिए आधारभूत भूजल प्रबंधन को सुधारना, गिरते भूजल स्तर की दर में कमी लाने, ग्राम पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा योजनाएं बनाने के साथ महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना इसका उद्देश्य था। भारतीय गुणवत्ता परिषद की टीम ने अलग अलग पंचायतों का दौरा कर सत्यापन किया। टीम ने 10 दौरे किए और इसकी रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी। इसमें राजस्थान में पिछले तीन साल में जल स्तर सुधारने व बेहतर प्रबंधन करने वाली पंचायतों की संख्या 189 से बढ़कर 771 तक पहुंची। जहां वर्ष 2023 में 8 पंचायत समितियों की 189 ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर में सुधार पाया गया है। इसके अगले साल 2024 में करीब सौ पंचायतें और बढ़ीं। इस वर्ष 12 पंचायत समितियों की 286 पंचायतों में भूजल स्तर में गिरावट थमी। 2025 में यह आंकड़ा 771 तक पहुंच गया। उद्यानिकी विभाग को सबसे ज्यादा बजट मिला योजना के अंतर्गत तकनीक के साथ सामुदायिक निगरानी, जल पुनर्भरण ढांचे, चेक डैम, तालाब का निर्माण और कम पानी वाली फसलों पर जोर दिया गया। इसमें सबसे ज्यादा राशि उद्यानिकी विभाग को 131.04 करोड़ आवंटित की गई। इसके बाद 116.58 करोड़ कृषि विभाग, वन विभाग को 86.47 करोड़, जल संसाधन विभाग को 42.79 करोड़, जलग्रहण एवं भूसंरक्षण विभाग को 19.43 करोड़, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग को 17.96 व भूजल विभाग को 3.63 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।