गुजरात हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच ने शुक्रवार को सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज बेचने पर रोक को हटा दिया। इस फैसले के करीब 2 दो घंटे बाद डबल बेंच ने इस फैसले पर स्टे लगा दिया। यानी मंदिर के आसपास नॉनवेज की बिक्री नहीं हो सकेगी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में जस्टिस निशा ठाकोर ने फैसला सुनाया था। उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि स्थानीय प्रशासन ने अपनी गलत शक्तियों का इस्तेमाल किया। चीफ जस्टिस मनश रंजन पाठक और जस्टिस निर्जर देसाई ने स्टे लगा दिया। गुजरात सरकार ने इस साल अगस्त में नोटिफिकेशन जारी किया था कि सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे और मंदिर जाने वाले 6 मुख्य रास्तों पर नॉनवेज बनाना-बेचना पूरी तरह बैन होगा। इस फैसले के खिलाफ 7 रेस्टोरेंट मालिक ने याचिका लगाई थी। अब इस मामले में 26 दिसंबर को सुनवाई होगी। रेस्टोरेंट मालिक बोले- हम लाइसेंस के साथ कारोबार कर रहे इस फैसले के खिलाफ सोमनाथ के 7 रेस्टोरेंट मालिक हाईकोर्ट गए। उनका दावा था कि- हम 20-25 साल से लाइसेंस लेकर चल रहे हैं, लेकिन सरकार इसे जबरदस्ती बंद करवा दिया। साथ ही एक व्यापारी को तो पुलिस चौकी में ले जाकर लिखवाया कि भविष्य में नॉन-वेज नहीं बेचेंगे। ये हमारे आर्टिकल 19(1)(g)- व्यापार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। गुजरात सरकार की दलील- दुकान बंद नहीं करवाई सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार के वकील जीएच विर्क दलील दी- “सोमनाथ सिर्फ बाजार नहीं है। 1.16 करोड़ श्रद्धालु 9 महीने में आते हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर (स्वर्ण मंदिर), मथुरा-वृंदावन, अयोध्या में भी ऐसे बैन हैं और हाईकोर्ट ने उन्हें सही माना है। हम दुकान बंद नहीं करवा रहे, वे वेज बेच सकते हैं।” सरकार का यह भी तर्क था कि अब सोमनाथ जिला नया बना है, एरिया बड़ा हो गया है। मंदिर का कॉरिडोर बना है, तो बैन का एरिया भी बढ़ाना जरूरी है। इस पर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार हर बार पुराने ऑर्डर के ऊपर नया ऑर्डर लगाकर धीरे-धीरे पूरे सोमनाथ टाउन को ही वेज जोन बना रही है, बिना कोई नया कारण बताए। नॉनवेज बैन से जुड़ी टाइमलाइन ----------------- ये खबर भी पढ़ें… सरकारी खजाने से सोमनाथ मंदिर बनवाने के खिलाफ थे गांधी: नेहरू उद्घाटन में क्यों नहीं गए; आज 75 साल पूरे होने पर मोदी पहुंचे 11 मई 1951, गुजरात का प्रभास पाटन क्षेत्र। 1300 सालों में 7वीं बार सोमनाथ मंदिर नए सिरे से बनकर तैयार था। उद्घाटन के लिए मंदिर ट्रस्ट के मुखिया और तब केंद्रीय मंत्री रहे केएम मुंशी ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। लेकिन नेहरू ने आने से साफ मना कर दिया। उनके मना करने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद मंदिर पहुंचे और उद्घाटन में शामिल हुए थे। पढ़ें पूरी खबर…