पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने गुरुवार को अजमेर में पेपर लीक के मुद्दे पर कहा कि जब वे मंत्री थे, तब भी पेपर आउट हुए थे। उन्होंने कहा कि वे इस बात का अभिमान नहीं करते कि उनके कार्यकाल में ऐसा नहीं हुआ। गुलाबचंद कटारिया ने कहा- गरीब मां-बाप भूखे रहकर, घर-जमीन गिरवी रखकर बच्चों को पढ़ाते हैं। ऐसे में परीक्षा के बाद पेपर रद्द होने पर बच्चा टूट जाता है। इस समस्या का समाधान भाषणबाजी से नहीं, बल्कि सभी को साथ बैठकर स्थाई हल निकालने से होगा। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया गुरुवार को अजमेर पहुंचे। वे परिवार के साथ जैन तीर्थ सम्मेद शिखर जी के दर्शन करने जा रहे हैं। अजमेर से उनकी कनेक्टिंग ट्रेन होने के कारण वे यहां रुके हैं। छात्र आंदोलनों के सवाल पर कटारिया ने कहा कि युवाओं को हिंसा से दूर रहना चाहिए, और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था तोड़कर या हिंसा फैलाकर हासिल की गई जीत से जनता का भला नहीं होता। छात्र राजनीति में तांडव की स्थिति नहीं बननी चाहिए- कटारिया राजस्थान में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों पर गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि चुनाव लड़ना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। छात्र राजनीति में हिंसा और तांडव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। केवल चुनावों पर रोक लगाना स्थाई समाधान नहीं है। जीतने के बाद मैं सिर्फ बीजेपी का विधायक नहीं- गुलाबचंद कटारिया उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरी जनता का होता है। वे बोले- सही काम चाहे किसी का भी हो, उसे करना चाहिए और गलत काम अपनों का भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग इस सिद्धांत पर चलें या न चलें, वे खुद इस रास्ते पर चले हैं और जब तक जिंदा रहेंगे, इसी पर चलेंगे। उन्होंने अपने विधायक रहने के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, "चुनाव जीतने के बाद मैं सिर्फ बीजेपी का एमएलए नहीं रहता, पूरी उदयपुर की जनता का जनप्रतिनिधि होता हूं। कटारिया बोले- अजमेर मेरा कार्यक्षेत्र रहा है अजमेर से अपने पुराने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कटारिया ने कहा, "अजमेर मेरा कार्यक्षेत्र रहा है। यहां 50-100 बार आया हूं। अब संवैधानिक पद की नई जिम्मेदारी है, इसलिए राजनीतिक दृष्टि से आना नहीं होता, केवल विशेष कार्यक्रमों में ही शिरकत होती है। सभी पक्षों को साथ बैठकर पेपर लीक का स्थाई हल निकालना होगा पेपर लीक पर गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि यह केवल परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों और बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहते हैं। इस समस्या पर केवल भाषण देने से समाधान नहीं निकलेगा। सभी पक्षों को साथ बैठकर ऐसा स्थाई हल निकालना होगा, जिससे भविष्य में पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द करने जैसी नौबत ही नहीं आए। छात्र आंदोलन पर नसीहत- मौके भुनाने वाले हिंसा न फैलाएं, लोकतांत्रिक तरीके से लड़ें छात्र आंदोलन और चुनाव आयोग के विरोध में युवाओं के प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर कटारिया ने कहा कि कुछ तत्व ऐसे मुद्दों की तलाश में रहते हैं, जिनके जरिए वे राजनीति में मौके का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं स्टूडेंट था तो विश्वविद्यालयों में कॉमरेडों का दबदबा था, लेकिन विद्यार्थी परिषद के उभार के बाद स्थिति बदली। कटारिया ने युवाओं से अपील की कि वे अपने मुद्दों को उठाने के लिए हिंसा का रास्ता न अपनाएं और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने से बचें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था तोड़कर या हिंसा फैलाकर हासिल की गई जीत से जनता का भला नहीं होता। आंदोलन का उद्देश्य अपनी बात सरकार और संबंधित पक्षों तक पहुंचाना होना चाहिए, न कि ऐसा माहौल बनाना जिसमें किसी निर्दोष छात्र की जान जोखिम में पड़ जाए। कटारिया ने जेपी आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौर में भी जयप्रकाश नारायण ने लोकतांत्रिक तरीके से युवाओं को जगाया था। युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखनी चाहिए। आंदोलन और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इसमें हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। छात्रसंघ चुनाव पर बोले- चुनाव लड़ना छात्रों का अधिकार, रोक लगाना स्थाई हल नहीं राजस्थान में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों के मुद्दे पर कटारिया ने कहा कि चुनाव लड़ना विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक अधिकार है। छात्र राजनीति में चुनाव होने चाहिए, लेकिन उनका माहौल शांतिपूर्ण और सम्मानजनक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब छात्र राजनीति हिंसा और तांडव में बदल जाती है, तो सरकारों को मजबूर होकर चुनावों पर रोक लगानी पड़ती है। हालांकि, केवल रोक लगा देना इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। कटारिया के मुताबिक, विश्वविद्यालयों में चुनाव होने चाहिए और विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए। चुनाव में जिसे जनादेश मिले, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। छात्र राजनीति में प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन वह हिंसा या टकराव में नहीं बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर दोनों पक्षों को बैठकर समझना होगा कि चुनाव किस तरह कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार भी बने रहें और विश्वविद्यालयों का माहौल भी खराब न हो।