प्रदेशभर में चल रहे शहरी सेवा शिविर-2026 को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने शिविर की जमीन और पट्टों से जुड़ी छह सबसे अहम राहत योजनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इससे सरकारी जमीन, कच्ची बस्तियों, कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों और अन्य मामलों में पट्टे मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों को फिलहाल इंतजार करना होगा। हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के बाद नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। स्वायत्त शासन विभाग ने गत 10 जून को एक आदेश जारी कर 12 जून से 15 जुलाई तक चलने वाले शहरी सेवा शिविर में जनहित में छूट और निकाय स्तर पर 22 कामों को पूरा करवाने के लिए कहा था। इसके खिलाफ 24 जून को हाईकोर्ट में पीआईएल दायर कर दी गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ रियायतें नियमों के विपरीत हैं। इस पर हाईकोर्ट ने 6 जुलाई को शिविर में 6 कामों पर कार्रवाई नहीं करने के आदेश दिए। अब हाईकोर्ट के अगले आदेश तक नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका, विकास प्राधिकरण और आवासन मंडलों को 6 कामों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। शिविर की ये 6 बड़ी राहतें अब नहीं मिल पाएंगी 1. कॉलोनियों का नियमितीकरण रुका : सरकारी भूमि पर लंबे समय से बसे लोगों को नियमित करने की प्रक्रिया अगले आदेश तक बंद रहेगी। 2.कच्ची बस्तियों के पट्टे अटके : डिनोटिफाइड कच्ची बस्तियों में कब्जाधारियों को नियमित करने और पट्टे की प्रक्रिया भी फिलहाल स्थगित रहेंगी। 3.कृषि भूमि की कॉलोनियों को राहत नहीं : 17 जून 1999 से पहले कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत कॉलोनियों के सुओमोटो ले-आउट प्लान अनुमोदन संबंधी मामलों में भी अब निर्णय नहीं होगा। 4.खांचा भूमि के प्रकरण रुके : खांचा भूमि के आवंटन और नियमितीकरण से जुड़े मामलों पर भी रोक लगा दी गई है। 5.अपंजीकृत इकरारनामों पर पट्टा नहीं मिलेगा : अपंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर अब पट्टा जारी नहीं हो सकेंगे। इससे 17 जून 1999 से पहले और बाद की कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत कॉलोनियों के हजारों संभावित आवेदकों का भी प्रभावित होना तय माना जा रहा है। 6. अतिरिक्त प्रीमियम व स्टाम्प शुल्क में 100 प्रतिशत तक दी जा रही छूट भी अगले आदेश तक बंद रहेगी। सबसे ज्यादा असर इन पर : इस आदेश का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो शहरी सेवा शिविर में पट्टा, कॉलोनी नियमितीकरण, सरकारी भूमि का नियमन या अपंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर मालिकाना हक लेने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इन सभी मामलों में अब फैसला हाईकोर्ट के अगले आदेश के बाद ही हो सकेगा।