हनुमानगढ़ में महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिरोध बढ़ गया है। गुरुवार को भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, कांग्रेस ने भी जिला कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें कांग्रेस ने अपना पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने बताया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून सितंबर 2023 में पारित हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जिस विधेयक पर चर्चा हो रही है, वह महिला आरक्षण में संशोधन से संबंधित है। महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव कृतिका चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख कविता मेघवाल और महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुलोचना बावरी सहित अन्य महिला नेताओं ने भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल के संशोधन में परिसीमन की शर्त जोड़कर आरक्षण को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। 'परिसीमन की शर्त से ध्रुवीकरण बढ़ेगा' कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया कि परिसीमन की शर्त से क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। इसलिए, उन्होंने मांग की कि महिलाओं को मौजूदा सीटों के आधार पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सितंबर 2023 में पारित कानून को लागू करने में अभी भी हिचकिचा रही है। उन्होंने मांग की कि बिना किसी अतिरिक्त शर्त के महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए, जिससे महिलाओं को राजनीति में समान अवसर मिल सकें। आंदोलन की चेतावनी कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने महिला आरक्षण को लेकर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो इस मुद्दे पर एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर सहित कई अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।