हनुमानगढ़ के गांव कुलचंद्र में जर्जर खाले के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर 3 किसान रविवार शाम से पानी की टंकी पर चढ़े हुए हैं। लगभग 18 घंटे बीत जाने के बाद भी वे नीचे नहीं उतरे हैं। अभिमन्यु झोरड़, रामकुमार भोभिया और दिनेश कुमार सहारण नामक ये किसान टंकी पर डटे हुए हैं। वाटर वर्क्स परिसर में ग्रामीण मौजूद हैं और पुलिस टीम भी रात से मौके पर तैनात है। सोमवार को इस मामले पर महापंचायत भी बुलाई गई थी। वार्ता में नहीं बनी सहमति रविवार देर शाम टिब्बी में प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच वार्ता हुई, लेकिन कोई पूर्ण सहमति नहीं बन पाई। इसी कारण किसान अभी तक टंकी से नीचे नहीं उतरे हैं। किसानों का आरोप है कि 602 का खाला पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे टेल क्षेत्र तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके परिणामस्वरूप फसलें खराब हो रही हैं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार बताई समस्या, हर बार मिला आश्वासन आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। किसान खाले को 'नकारा' घोषित कर उसके पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। टिब्बी के एसडीएम सत्यनारायण सुथार ने बताया कि खाले को 'नकारा' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान तुरंत निर्माण शुरू करवाना चाहते हैं, लेकिन इसकी एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसका पालन किए बिना निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। एसडीएम ने कहा कि किसानों को नीचे उतारने के लिए दोबारा वार्ता की जाएगी। वहीं आंदोलनकारी किसानों के अनुसार, 27 अप्रैल को हुई महापंचायत में प्रशासनिक अधिकारियों ने 5 मई तक खाले को 'नकारा' घोषित करने और 11 मई से पुनर्निर्माण कार्य शुरू करवाने का लिखित आश्वासन दिया था। किसानों का आरोप है कि तय समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।