हनुमानगढ़ में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत निशुल्क दवा और चिकित्सा सेवाएं बाधित होने से पेंशनर्स में भारी रोष है। बुधवार को जंक्शन और टाउन के राजस्थान पेंशनर समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) को सौंपा। उन्होंने तत्काल प्रभाव से व्यवस्था बहाल करने की मांग की। पेंशनर्स ने बताया कि सूचीबद्ध अस्पतालों और फार्मा स्टोर्स द्वारा आरजीएचएस सेवाओं का बहिष्कार किए जाने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समाज के जंक्शन जिलाध्यक्ष अशोक कुमार खत्री के अनुसार पिछले लगभग एक साल से पेंशनर्स को अनुमोदित अस्पतालों में निशुल्क उपचार प्राप्त करने में कठिनाई आ रही है। 14 अप्रैल के बाद यह स्थिति और भी खराब हो गई है। वर्तमान में अधिकांश सूचीबद्ध अस्पताल आरजीएचएस के तहत इलाज प्रदान नहीं कर रहे हैं और फार्मा स्टोर्स ने भी निशुल्क दवाइयां देना बंद कर दिया है। इससे नियमित दवाइयों और इलाज पर निर्भर बुजुर्ग पेंशनर्स को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई पेंशनर्स को मजबूरन निजी खर्च पर उपचार करवाना पड़ रहा है। पेंशनर समाज ने जानकारी दी कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने कई बार चिकित्सा विभाग और आरजीएचएस अधिकारियों से संपर्क कर समस्या समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। मुख्यमंत्री को भी पत्र और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से इस स्थिति से अवगत कराया गया था। समाज की ओर से 6 मई को राजस्थान के मुख्य सचिव को एक नोटिस जारी कर 11 मई तक व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि समाधान नहीं होता है, तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके बावजूद, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किसी पेंशनर के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पेंशनर्स ने आरजीएचएस के अंतर्गत निशुल्क दवा और उपचार व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुचारू करने की मांग दोहराई। इस दौरान रमेश चंद्र रहेजा, रमेश दरगन, ललित चड्ढा, गौरीशंकर, गुरदीप सोहल, यादवेंद्र सिंह, गुरुचरण सिंह सहित कई अन्य पेंशनर्स उपस्थित रहे।