अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई को दावा किया कि गाजा को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हट जाएगी। ट्रम्प के ऐलान के बाद से सवाल पूछे जाने लगे हैं कि क्या इजराइल सच में गाजा से अपनी सेना हटा लेगा? यही शर्त अब इजराइल की राजनीति में सबसे बड़े विवाद की वजह बन गई है। इजराइल में कई नेता और वहां का मीडिया इस समझौते को लेकर नाराज हैं। एक तरफ ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि इजराइल इस समझौते से बेहद खुश है। दूसरी तरफ इजराइल ने अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब तक हमास के पूरी तरह हथियार छोड़ने का पक्का भरोसा नहीं हो जाता, तब तक गाजा से सेना हटाने का सवाल ही नहीं उठता। गाजा से सेना हटाने का इजराइल में इतना विरोध क्यों? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। तब से अब तक 73 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाजा का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है। इसके बावजूद इजराइल में बड़ी संख्या में लोग अब भी गाजा के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं। जाहिर है कि गाजा से सेना हटाने और वहां दोबारा फिलिस्तीनी सरकार बहाल करने का विचार इजराइल में कई लोगों को पसंद नहीं है। उन्हें डर है कि अगर सेना हट गई तो हमास फिर से मजबूत होकर 7 अक्टूबर जैसा हमला कर सकता है। यही वजह है कि सरकार के कई मंत्री गाजा में भी वेस्ट बैंक की तरह यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में गाजा से सेना की वापसी और पुनर्निर्माण की योजना का विरोध होना स्वाभाविक माना जा रहा है। किन नेताओं ने सबसे ज्यादा विरोध किया? बेजलेल स्मोट्रिच: वित्त मंत्री नेतन्याहू सरकार में वित्त मंत्री रहे स्मोट्रिच ने कहा कि गाजा से इजराइली सेना नहीं हटनी चाहिए। हमास के लोगों से हथियार छीनना ही पहली शर्त है। आखिरकार इजराइल पूरे गाजा पर नियंत्रण करेगा और वहां फिर से यहूदी बस्तियां बसाई जाएंगी। इतमार बेन ग्विर: राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर ट्रम्प के प्लान को बुरा बताते हुए कहा कि अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया, तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा। गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और वहां से लोगों के पलायन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।और गादी आइजनकोट: पूर्व आर्मी चीफ ट्रम्प के ऐलान का विरोध सिर्फ कट्टर दक्षिणपंथी नेता ही नहीं कर रहे। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी इसके खिलाफ माने जा रहे हैं। इस साल अक्टूबर में होने वाले चुनाव में गादी को नेतन्याहू का सबसे बड़ा विरोधी माना जा रहा है। गादी ने कहा कि अगर हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती, तो यह इजराइल की बड़ी नाकामी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमास पहले जितना ही मजबूत हो चुका है। नेतन्याहू सबसे मुश्किल स्थिति में क्यों हैं? प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक इस समझौते पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शायद उनकी चुप्पी ही बताती है कि वे कितनी मुश्किल स्थिति में हैं। एक तरफ ट्रम्प हैं, जो इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी हैं, जो गाजा से सेना हटाने के सख्त खिलाफ हैं। अगर नेतन्याहू गाजा से सेना हटाने पर सहमत होते हैं, तो चुनाव से पहले उनके कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी और वोटर उनसे दूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर वे समझौते को पूरी तरह ठुकरा देते हैं, तो ट्रम्प और अमेरिका नाराज हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू शायद बीच का रास्ता अपनाएं। यानी कुछ इलाकों से सेना पीछे हटाने का दिखावा करें, लेकिन गाजा से पूरी तरह न निकलें। ट्रम्प को नाराज करना नेतन्याहू के लिए बहुत मुश्किल नेतन्याहू पर दबाव सिर्फ इजराइल के भीतर से नहीं, बल्कि अमेरिका से भी है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डोव वैक्समैन के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू ट्रम्प से रिश्ते खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। हाल के समय में इजराइल में यह चर्चा बढ़ी है कि ट्रम्प सरकार का रुख पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन इस पर लगभग सभी की राय एक है कि अमेरिका का सैन्य और सुरक्षा समर्थन इजराइल के लिए जरूरी है। इसीलिए विपक्ष नेतन्याहू को लगातार चेतावनी देता रहा है कि अगर अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़े, तो इसका राजनीतिक नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों से जूझ रहे नेतन्याहू को ट्रम्प से राजनीतिक और नैतिक समर्थन की उम्मीद है। नेतन्याहू यह भी चाहते होंगे कि ट्रम्प चुनावी माहौल में उनके लिए कोई बड़ा कूटनीतिक या राजनीतिक फायदा दिला सकते हैं। इसमें सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंध सामान्य कराने जैसा बड़ा समझौता या उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों पर समर्थन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। क्या सच में इजराइल गाजा से निकल जाएगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल 'नहीं' मिलता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी की संभावना लगभग नामुमकिन है। नेतन्याहू ट्रम्प को यह दिखा सकते हैं कि समझौता आगे बढ़ रहा है। इसके लिए वे समझौते की घोषणा, हस्ताक्षर समारोह या कुछ और करने का नाटक कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इजराइल गाजा से सेना हटा लेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गाजा से सेना न हटाना सिर्फ चुनावी या राजनीतिक मजबूरी नहीं है। यह नेतन्याहू की सुरक्षा नीति का भी अहम हिस्सा है। उनका हमेशा से मानना रहा है कि खतरों को रोकने के लिए इजराइल को अपनी सीमाओं के बाहर भी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी चाहिए। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ नेतन्याहू गाजा से पीछे हटने के बजाय और सख्त रुख अपना सकते हैं। -------------------------------------- इजराइल-गाज से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प का दावा- हमास-इजराइल में शांति समझौता:हमास हथियार छोड़ेगा, इजराइली सेना पीछे हटेगी; नई फिलिस्तीनी सरकार गाजा को कंट्रोल करेगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को दावा किया कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। हमास और दूसरे सभी हथियारबंद संगठनों ने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है। इसके बाद इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हटेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…