आपसी लेनदेन, जमीन जायदाद और कॉमर्शियल विवाद सहित अन्य सिविल मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग आदेशों और उसके बाद जारी डीजीपी के सर्कुलर में यह स्पष्ट निर्देश है। लेकिन उसके बाद भी सिविल नेचर के एक केस में FIR दर्ज करने और डीजीपी (राजीव कुमार शर्मा) के सर्कुलर की पालना नहीं होने पर जयपुर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने डीजीपी राजीव कुमार शर्मा को निर्देश दिए हैं कि वह इस प्रकार के उल्लंघन की रिपिटेशन को रोकने के लिए नए सिरे से निर्देश जारी करे। जयपुर कोर्ट ने यह आदेश 18 अप्रैल को दिए हैं। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बेंच ने यह आदेश धर्मेंद्र ठक्कर व अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि डीजीपी इस मामले में सर्कुलर की पालना न होने के कारणों की जांच करें और लापरवाही करने वाले अधिकारी की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करें। कॉर्मिशियल विवाद में FIR दर्ज की दरअसल, टोंक जिले के निवाई थाना पुलिस ने दो पक्षों के बीच हुए कमर्शियल विवाद में एफआईआर दर्ज की थी। एक पक्ष का आरोप था कि उसने दूसरे पक्ष को माल बेचा था, लेकिन बदले में 18 लाख रुपए से अधिक की राशि का भुगतान नहीं किया गया। आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि यह पूरी तरह से सिविल नेचर का मामला है, लेकिन पुलिस इसे आपराधिक रंग देते हुए गिरफ्तारी का दबाव बना रही है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और डीजीपी के 10 जून 2025 के सर्कुलर में साफ-साफ लिखा है कि सिविल नेचर के मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में इन निर्देशों की पूरी तरह अवहेलना की गई। डीजीपी कड़ाई से सर्कुलर की पालना करवाएं हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि सिविल नेचर के मामले में तब तक FIR दर्ज नहीं की जा सकती, जब तक उसमें आपराधिक मामला नहीं बनता है। यदि कोई विरोधाभास हो तो संबंधित पुलिस अधीक्षक से अनुमति लेना जरूरी है। कोर्ट ने कहा, “हम डीजीपी को निर्देश देते हैं कि वे पूरे प्रदेश में अपने सर्कुलर की कड़ाई से पालना करवाएं तथा ऐसे उल्लंघन दोबारा न हों, इसके लिए नए निर्देश और आवश्यक उपाय करने पर तुरंत विचार करें। --- ये खबर भी पढ़ें हाईकोर्ट बोला- बहू अनुकंपा नियुक्ति की हकदार:कहा- यह देखकर आश्चर्य हुआ कि विभाग ने वही आपत्ति उठाई, जिन्हें पहले ही कोर्ट खारिज कर चुका राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बहू अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। जस्टिस रवि चिरानियां ने यह आदेश सुंदरी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने मामले में नाराजगी जताते हुए कहा- जब 2023 में ही हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच यह तय कर चुकी है कि बहू भी बेटी के समान ही अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है तो विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियां विधि सम्मत नहीं हैं। (पूरी खबर पढ़ें)