आसमान में गोता लगाते और कलाबाजियां दिखा रहे ये छोटे प्लेन और हेलीकॉप्टर भले ही युवा इंजीनियर्स रिमोट से चला रहे थे लेकिन इनका हुनर और कंट्रोल देखकर सहज कहा जा सकता है कि आज जो हाथ कागज और बाल्सा के मॉडल उड़ा रहे हैं, कल वही देश के सपनों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। मौका था जोधपुर में पहली बार हुई नेशनल एयरोमॉडलिंग प्रतियोगिता का। राज इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई दो दिन की इस प्रतियोगिता में देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपने बनाए विमान मॉडलों के जरिए फ्लाइट स्किल्स दिखाई। जोधपुर टीम के एयर शो ने भी दर्शकों को रोमांचित किया। एयरोमॉडलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएमए) की ओर से हुई इस प्रतियोगिता में अध्यक्ष ओंकार दत्त शर्मा के साथ उदयपुर के डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का भी सहयोग रहा। मुख्य पर्यवेक्षक विशाल शर्मा थे जबकि 4 राज एयर स्क्वाड्रन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर तरुण पंडित चीफ गेस्ट थे। मॉडल प्लेन व हेलीकॉप्टर तैयार करने में शर्मा मॉडल एयरो इंजन्स का भी सहयोग रहा। बता दें कि एयरोमॉडलिंग स्टूडेंट्स के लिए विज्ञान को प्रयोग से समझने का माध्यम है। विमान मॉडल बनाने और उड़ाने से वायुगतिकी, गुरुत्वाकर्षण, संतुलन और गति के सिद्धांत समझने में मदद मिलती है। साथ ही रचनात्मकता, एकाग्रता, धैर्य और टीम भावना भी विकसित होती है। कई कैटेगिरी में हुए मुकाबले यहां रिमोट कंट्रोल (आरसी) प्लेन और हेलीकॉप्टर, कंट्रोल लाइन मॉडल तथा चक ग्लाइडर श्रेणियों में मुकाबले हुए। प्रतिभागियों के मॉडल जब आसमान में कलाबाजियां दिखा रहे थे, तब दर्शकों की तालियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं। अनुभवी एयरोमॉडलर्स के साथ स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स और एनसीसी कैडेट्स ने उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता में देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपने बनाए विमान मॉडलों के जरिए फ्लाइट स्किल्स दिखाई।