भास्कर न्यूज | राजसमंद बारिश का प्रमुख महीना माने जाने वाले आषाढ़ की शुरुआत के बावजूद जिले में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। आषाढ़ के दूसरे दिन बुधवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। शाम के समय आमेट क्षेत्र में कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश हुई। आमेट कस्बे में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि सेलागुढ़ा, ढेलाणा, नारूजी का गुड़ा और काजी का गुड़ा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जिससे सड़कों पर पानी बह निकला। इसके अलावा बागोटा, सांगठकला, पुठोल, भुडान और सापोल सहित अन्य क्षेत्रों में भी कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश हुई। जिले के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहने से उमस बनी रही। पिछले तीन दिनों से जिले का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर बना हुआ है। हवा की गति कम होने से वातावरण में नमी बढ़ गई, जिससे उमस ने लोगों को परेशान किया। दोपहर में तेज धूप के कारण गर्मी का असर बना रहा, जबकि शाम को मौसम सुहावना होने पर लोग राजसमंद झील, इरिगेशन गार्डन और नौ चौकी पाल पर घूमने पहुंचे। दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियां मेवाड़ में तेज होने लगी हैं। अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण 4 जुलाई तक राजसमंद सहित दक्षिणी राजस्थान में मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है। इस दौरान कई स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। उन्होंने किसानों को मौसम पूर्वानुमान के अनुसार बुवाई करने और भारी बारिश की संभावना के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी। यदि मानसून तय समय पर सक्रिय होता है तो जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों और जलाशयों दोनों को लाभ मिलेगा। जगदीश चौधरी, मौसम वैज्ञानिक जिले के सबसे बड़े राजसमंद बांध में एक जुलाई तक 20.30 फीट पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन जलस्तर 14.90 फीट था। नंदसमंद बांध में 15.50 फीट पानी है, जो पिछले वर्ष के 9.80 फीट की तुलना में 5.70 फीट अधिक है। मनोहर सागर तालाब में 4.50 फीट पानी है, जो गत वर्ष से तीन फीट ज्यादा है। चिकलवास बांध में 54.30 फीट पानी दर्ज किया गया, जो पिछले साल से 2.20 फीट अधिक है। हालांकि बाघेरी नाका बांध में इस बार 21.80 फीट पानी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में छह फीट कम है। सांसेरा बांध में छह फीट और भोपाल सागर में एक फीट पानी शेष है।