जोधपुर हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग के कड़े आदेशों के बाद उदयपुर के चारों मैनुअल वाहन फिटनेस सेंटर्स को बंद करने का जो खमियाजा एक महीने से स्थानीय वाहन मालिक भुगत रहे थे, वह संकट अब पूरी तरह खत्म होने जा रहा है। मादड़ी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक पुराने फिटनेस सेंटर को अपग्रेड कर नया हाईटेक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पूरी तरह बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस सेंटर पर प्रतिदिन औसत 90 वाहनों की फिटनेस जांच करने की क्षमता है। सेंटर शुरू करने की अनुमति के लिए प्रादेशिक परिवहन कार्यालय उदयपुर में आदेवन कर दिया गया है। अब विभागीय जांच-पड़ताल के बाद मुख्यालय जयपुर से इस सेंटर को शुरू कराने की अनुमति मिलने की प्रक्रिया अगले सप्ताह तक पूरी होने की उम्मीद है। नई हाईटेक व्यवस्था के धरातल पर शुरू होते ही मेवाड़ के 22 हजार से अधिक वाहन मालिकों और इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 44 हजार से अधिक स्टाफ को बहुत बड़ी राहत मिलना शुरू हो जाएगी। फिटनेस प्रमाण-पत्र मिलने के बाद वाहन मालिकों की आय फिर से शुरू होगी, जिससे वाहनों की किस्त चुकाने में आसानी होगी और 44 हजार से अधिक स्टाफ को फिर से नियमित रोजगार मिलना प्रारंभ हो जाएगा। इस नए सेंटर से वाहन मालिकों को जयपुर-अजमेर के चक्करों से मुक्ति मिलेगी। मौजूदा हाल : एक माह से शहर में फिटनेस का काम ठप पिछले एक महीने से कमर्शियल वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया बंद रहने से उदयपुर का ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म सेक्टर प्रभावित रहा। रोज औसतन 65 वाहनों का काम रुकने से करीब 22 हजार वाहनों का बैकलॉग जमा हो गया। बिना फिटनेस वाहन चलाने पर दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर देती हैं। परिवहन मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता देवीलाल के अनुसार, इसी डर से कई वाहन मालिकों ने गाड़ियां खड़ी कर दीं। इसका असर उदयपुर-राजसमंद बेल्ट के मार्बल-माइनिंग उद्योग और पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ा। फिटनेस के लिए 350 किलोमीटर दूर अजमेर या जयपुर जाना अतिरिक्त बोझ था। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों के पांचों टोल प्लाजा पर लगे कैमरे बिना फिटनेस वाले वाहनों की पहचान कर 5 से 10 हजार रुपए तक के ई-चालान भी भेज रहे थे। आगे : हाईटेक सेंसर्स से होगी जांच, इंसानी दखल खत्म