दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार रात करीब 2:27 बजे ऋषिकेश से इंदौर जा रही हंस ट्रेवल्स की स्लीपर बस ट्रोले से टकराने के बाद आग का गोला बन गई। हादसे में बस चालक समेत 6 यात्री जिंदा जल गए, जबकि दो यात्रियों की सिर में गंभीर चोट लगने से मौत हो गई। बस में सवार 26 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें से 12 का उपचार दौसा जिला अस्पताल में चल रहा है। जले हुए शवों की पहचान डीएनए जांच से की जाएगी। कोलवा थाना क्षेत्र में बांदीकुई-जयपुर इंटरचेंज के पास हुए इस हादसे के समय बस में करीब 40 यात्री सवार थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आगे चल रहे ट्रोले को ओवरटेक करने के प्रयास में बस की उससे भीषण भिड़ंत हो गई। टक्कर के कुछ ही देर बाद बस में धुआं भरने लगा और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। अधिकांश यात्री बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कुछ लोग बस में ही फंस गए। देखते ही देखते बस और ट्रोला आग की लपटों में घिर गए। वहीं, ऋषिकेश से मंगलवार शाम करीब 4 बजे इंदौर के लिए रवाना हुई स्लीपर बस को कुल 995 किमी का सफर तय करना था। हालांकि, बस करीब 470 किमी की दूरी तय करने के बाद ही हादसे का शिकार हो गई। वहीं, हादसा स्थल के पास सुमेरकला निवासी महेंद्र नागर ने दावा किया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो बस का स्टोरेज बॉक्स सिगरेट के पैकेटों से भरा हुआ था। अंतिम सफर... वैष्णो देवी दर्शन कर लौट रहा था इंदौर का परिवार; पत्नी बच्चों संग बची, पति दीपक आग में घिर गए मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह निवासी दिव्या तंवर ने बताया कि उनका परिवार वैष्णो देवी और हरिद्वार दर्शन कर इंदौर लौट रहा था। हादसे के दौरान बस में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने पति दीपक तंवर को काफी तलाशा, लेकिन वे नहीं मिले। वे लपटों से घिर गए। बच्चों को लेकर किसी तरह बस से बाहर निकलीं और अस्पताल पहुंचकर भी पति को खोजने की गुहार लगाती रहीं। दिव्या का कहना है कि दमकल समय पर पहुंचती तो कई जानें बच सकती थीं। वहीं, मृतक के भाई सन्नी तंवर ने बताया कि परिवार के सात सदस्य 23 जून को वैष्णो देवी दर्शन के लिए निकले थे। हरिद्वार से मंगलवार शाम 4:20 बजे इंदौर के लिए रवाना हुए थे, लेकिन हादसे में दीपक की मौत हो गई। सभी मृतक मध्यप्रदेश के, ऋषिकेश से इंदौर जा रही थी स्लीपर बस हादसे में बस परिचालक कुलदीप कुमार और मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भूतेड़ी निवासी धर्म सिंह (31) की सिर में चोट लगने से मौत हुई। वहीं, भूमि भौर (20) निवासी बजरंग नगर, इंदौर; प्रियंका पांडे (35); दीपक तंवर (29) निवासी होली टेकड़ा, बड़वाह (खरगोन); देवेंद्र सिंह उर्फ दीपू (60) निवासी रामपुरा कलां, सिद्धगंज (सीहोर); निर्मला गुप्ता (61) निवासी अन्नपूर्णा नगर, इंदौर तथा बस चालक रामवतार के शव आग में जल गए। जले हुए शवों में से चार के डीएनए सैंपल लिए गए हैं, जबकि दो मृतकों के परिजन नहीं पहुंचने से उनके सैंपल नहीं लिए जा सके। 26 घायल, 12 अस्पताल में भर्ती कालू सिंगाड़, स्वानंद गिररे, लीजा, प्रिंस सूर्यवंशी, नेहा, अनिता देवी, योगिनी पाटीदार, घीसूलाल, माहीर मोटिने, प्रदीप, मीहिर पांचाल, अंजली, ईशा सिंह, कनक, अविनेश, बीना, शिखा वर्मा, दिव्या, सन्नी तंवर, हर्षित तंवर, वंशराज, जितेंद्र पांडे, अभिनव पांडे, महक, मयंक तोमर और चंद्रप्रकाश गुप्ता घायल हुए हैं। 12 का उपचार दौसा जिला अस्पताल में चल रहा है। धमाके से नींद खुली, सीट में फंसे बेटे को बचा लिया...पत्नी आंखों के सामने ही राख हो गई 1. इंदौर निवासी वन विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र पांडे पत्नी प्रियंका और बेटे अभिनव के साथ हरिद्वार से लौट रहे थे। हादसे के धमाके से उनकी नींद खुली तो बेटा घायल था और पत्नी सीट के पास फंसी हुई थी। जितेंद्र ने पहले बेटे को बाहर निकाला, फिर पत्नी को बचाने के लिए दोबारा बस में पहुंचे, लेकिन उसका पैर फंसा होने से बाहर नहीं निकाल सके। आग की लपटें बढ़ती गईं और पत्नी मदद के लिए चिल्लाती रही। 2. इंदौर निवासी घायल चंद्रप्रकाश गुप्ता पत्नी निर्मला के साथ ऋषिकेश से लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि रात करीब 3 बजे धमाके और चीख-पुकार से नींद खुली। बस में धुआं भर चुका था और दोनों फंस गए थे। किसी तरह लोगों ने उन्हें बाहर खींच लिया, लेकिन उनकी पत्नी बस में ही फंसी रह गई। चंद्रप्रकाश ने कहा कि वह अपनी पत्नी को बचा नहीं सके और देखते ही देखते उनकी मौत हो गई।