मेडिकल रिपोर्ट और अलग-अलग सेंसर से मिलने वाले डेटा को समझना अब AI की मदद से आसान हो सकता है। IIT जोधपुर में ऐसा स्मार्ट असिस्टेंट विकसित करने पर रिसर्च चल रही है, जो मेडिकल रिपोर्ट से लेकर सेंसर डेटा तक को एक साथ समझ सकेगा। खास बात यह है कि इसे कम संसाधनों में चलाने और आम उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से इस्तेमाल होने लायक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। दरअसल, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT जोधपुर) में ऐसे AI असिस्टेंट विकसित करने पर रिसर्च किया जा रहा है, जो अलग-अलग तरह की जानकारी को एक साथ समझ सकें और जरूरत के मुताबिक सहायता दे सकें। इसका उपयोग भविष्य में मेडिकल से लेकर औद्योगिक क्षेत्र में किया जा सकेगा। इसके साथ ही एकेडिमक फील्ड में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा। एक साथ समझ सकेंगे तस्वीर, टेक्स्ट, दस्तावेज, आवाज और सेंसर डेटा एआई पर यह रिसर्च कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस रिसर्च का उद्देश्य ऐसे AI सिस्टम विकसित करना है जो तस्वीरों, टेक्स्ट, दस्तावेजों, आवाज और सेंसर डेटा जैसी अलग-अलग जानकारियों को एक साथ समझकर किसी खास काम में सहायता कर सकें। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसा AI सिस्टम मेडिकल इमेज, डॉक्टर की रिपोर्ट और मरीज से जुड़ी जानकारी को एक साथ देखकर चिकित्सकों की सहायता कर सकता है। उद्योगों में मशीन की तस्वीरों, सेंसर से मिले डेटा, मशीन के लॉग और तकनीकी मैनुअल को एक साथ समझकर खराबी का पता लगाने और समस्या के समाधान में मदद मिल सकती है। इसी तरह शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में ऐसे AI असिस्टेंट रिसर्च पेपर, दस्तावेज और अध्ययन सामग्री को समझने और उनसे उपयोगी जानकारी निकालने में मदद कर सकते हैं। भारत जैसे बड़े देश में ऐसे AI की जरूरत क्यों? भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग का दायरा बहुत बड़ा है। ऐसे में अलग-अलग स्रोतों से आने वाले विशाल डेटा को तेजी से समझने और उसका उपयोग करने वाले AI सिस्टम की जरूरत बढ़ रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों, विशेष रूप से विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता कई जगहों पर सीमित है। ऐसे में AI सिस्टम डॉक्टरों को मेडिकल इमेज, रिपोर्ट और मरीज से जुड़ी अन्य जानकारी को एक साथ समझने में सहायता दे सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसकी संभावनाएं बहुत व्यापक हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिटक्ट इंफोर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस ( UDISE+) 2024-25 के अनुसार देश में 24.69 करोड़ विद्यार्थी, 14.71 लाख स्कूल और 1.01 करोड़ शिक्षक हैं। इतने बड़े शिक्षा तंत्र में AI व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार सीखने और अकादमिक सहायता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उच्च शिक्षा में भी लगभग 4.46 करोड़ विद्यार्थी हैं। वहीं, भारत के विनिर्माण क्षेत्र का आकार भी बहुत बड़ा है। इतने बड़े औद्योगिक तंत्र में AI का उपयोग मशीनों की समय से पहले खराबी का पता लगाने, गुणवत्ता जांच, उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाने और निर्णय लेने में किया जा सकता है। छोटा और आसानी से यूज होने वाला है AI मॉडल IIT जोधपुर के इस शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू AI को छोटा, तेज और कम संसाधनों में चलने योग्य बनाना है। बड़े AI मॉडल के लिए महंगे कंप्यूटिंग संसाधनों और लगातार इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरत हो सकती है। रिसर्च का उद्देश्य ऐसे AI सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करना है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर, जैसे किसी अस्पताल, फैक्ट्री या कम इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्र में भी चलाया जा सके और जिनके लिए कम कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत हो। उद्देश्य- अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को समझ सकें डॉ. दिव्या सक्सेना के अनुसार, हमारा उद्देश्य ऐसे AI सिस्टम विकसित करना है जो अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को समझ सकें। वास्तविक परिस्थितियों में उपलब्ध सीमित संसाधनों के भीतर काम कर सकें और जरूरत के अनुसार उपयोगी सहायता दे सकें। AI का भविष्य केवल बड़े मॉडल बनाने में नहीं है, बल्कि AI को किफायती, बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने योग्य, सुरक्षित और जरूरत की जगह पर उपयोगी बनाने में भी है। उन्होंने बताया कि हम ऐसे AI सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं जो केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित न रहें, बल्कि जानकारी, ज्ञान और विभिन्न टूल्स को आपस में जोड़कर लोगों को वास्तविक जीवन के काम पूरे करने में मदद करें।