भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर में शनिवार को प्रथम ‘मरुधरा प्रतिबद्धता दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें संस्थान के संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन फाउंडेशन (JCKIF) के संग्रहालय और आर्टिजन शॉप का अवलोकन किया। यहां उन्होंने पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक के समन्वय को सराहा। यह पहल स्थानीय कारीगरों के सशक्तिकरण, स्वदेशी ज्ञान प्रणाली के संवर्धन और सतत आजीविका निर्माण की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दिखाती है। ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी सुविधा का उ‌द्घाटन मुख्य सचिव ने सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी का दौरा कर ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (TEM) सुविधा का उद्घाटन किया। यह मॉर्डर्न सुविधा मटेरियल साइंस, नैनो टेक्नोलॉजी और बहुविषयक शोध को नई दिशा देगी तथा विश्वस्तरीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। वैश्विक उत्कृष्टता और स्थानीय प्रभाव के बीच सेतु संस्थान के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने कहा कि ‘मरुधरा प्रतिबद्धता दिवस’ विकास के नए युग और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से लेकर स्मार्ट प्रोडक्ट डिजाइन तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, जलवायु अनुसंधान सहित अन्य क्षेत्रों में संस्थान तेजी से प्रगति कर रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि यह आयोजन ‘विकसित राजस्थान 2047’ के संकल्प को सुदृढ़ करता है। उन्होंने बताया कि IIT जोधपुर के साथ साझेदारी नवाचार, ग्रामीण परिवर्तन, एआई आधारित विनिर्माण, सतत संसाधन प्रबंधन और नीति समर्थन जैसे पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पांच नए विभार्गों का उद्घाटन इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक विस्तार के तहत माननीय मुख्य सचिव ने पांच नए विभार्गों का उद्‌द्घाटन किया-एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, ऊर्जा एवं ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग, पर्यावरण एवं स्थिरता इंजीनियरिंग तथा अर्थशास्त्र विभाग। ये विभाग बहुविषयक शिक्षा, नवाचार और वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को और सुदृढ करेंगे। इस अवसर मुख्य सचिव, निदेशक एवं डीन एवं विभागाध्यक्षों के बीच बोर्ड रूम में विचार-विमर्श में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास पर गहन चर्चा हुई।