शहर के थानों में पुलिसकर्मियों की कमी से कामकाज प्रभावित हो रहा है। पंचायत चुनाव में करीब 90% जाब्ता तैनात होने से सभी 10 थानों में गिनती के पुलिसकर्मी ही बचे हैं। कहीं 6 तो कहीं 10 जवानों के भरोसे थाने चल रहे हैं। इनमें सीआई, एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं। कुछ पुलिसकर्मी फील्ड में तैनात रहते हैं। ऐसे में बचे हुए जवानों को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। नफरी (स्टाफ) कम होने का असर अपराध की जांच, आरोपियों की तलाश, गश्त, शिकायतों पर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था संभालने पर पड़ रहा है। थानों में मौजूद पुलिसकर्मियों पर काम का दोहरा दबाव है। एक साथ दो घटनाएं होने पर दोनों जगह जाब्ता भेजना चुनौती बन जाता है। कुछ थानों में एसआई तक तैनात नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि सीमित पुलिस बल के बीच शहर में अपराध रोकने और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई करने की व्यवस्था कैसे चलेगी? स्थिति... इन 10 थानों में इतना ही स्टाफ बचा, 24 घंटे दे रहे ड्यूटी हिरणमगरी थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 3 कांस्टेबल अंबामाता थाना: 1 सीआई, 1 एसआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 3 कांस्टेबल गोवर्धन विलास थाना: 1 सीआई, 2 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 3 कांस्टेबल सुखेर थाना: 1 सीआई, 2 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 6 कांस्टेबल भूपालपुरा थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 4 कांस्टेबल घंटाघर थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 5 कांस्टेबल सूरजपोल थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 5 कांस्टेबल प्रतापनगर थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 6 कांस्टेबल हाथीपोल थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 4 कांस्टेबल सवीना थाना: 1 सीआई, 1 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 6 कांस्टेबल इन 4 स्तर पर कामकाज प्रभावित: लगातार ड्यूटी से जवान भी परेशान शिकायत पर तुरंत पहुंचना मुश्किल: थाने में सीमित पुलिसकर्मी होने से हर घटना पर तुरंत जाब्ता भेजना आसान नहीं है। एक टीम पहले से किसी मामले में लगी हो तो दूसरी शिकायत मिलने पर पुलिसकर्मियों को जुटाना पड़ता है। इससे मौके पर पहुंचने में देरी हो सकती है। गश्त प्रभावित: नफरी कम होने से नियमित गश्त पर असर पड़ रहा है। पुलिसकर्मियों को शिकायतों, जांच और अन्य ड्यूटी के बीच तालमेल बैठाना पड़ रहा है। लगातार 24 घंटे ड्यूटी करने से वे मानसिक और शारीरिक रूप से भी परेशान हो रहे हैं। जांच और गिरफ्तारी के लिए कम समय: घटनास्थल पर पहुंचने के अलावा बयान लेना, साक्ष्य जुटाना, आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी जैसे काम भी पुलिसकर्मियों को करने होते हैं। नफरी कम होने से इन कामों के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है। इससे जांच की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। शिकायत दर्ज कराने के लिए इंतजार: हर थाने में शिकायत लेने के लिए एक-एक जवान ही मौजूद है। ऐसे में शिकायतें सुनने और कागजी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लोगों को अपनी शिकायत पर कार्रवाई के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।