अगर किसी विमान में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आ जाए, इंजन फेल हो जाए या ईंधन गंभीर रूप से कम हो जाए, तो ऐसी आपात स्थिति में एयरपोर्ट और बचाव एजेंसियां कितनी तेजी और समन्वय के साथ काम कर सकती हैं। इसे परखने के लिए बुधवार को जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फुल-स्केल एयरोड्रोम इमरजेंसी एक्सरसाइज (FSAEE-2026) आयोजित की गई। मॉक ड्रिल के दौरान विमान की इमरजेंसी लैंडिंग और उसके बाद दुर्घटना जैसी स्थिति का वास्तविक माहौल तैयार किया गया। इस मॉक ड्रिल में एयरपोर्ट प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीमों और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चलाकर अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया। विमान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या पर हादसे की आशंका दरअसल, बुधवार शाम जयपुर एयरपोर्ट पर ड्रिल के तहत काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें विमान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या के कारण हादसा होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने इमरजेंसी घोषित की और एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF) की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद CISF, SDRF, राजस्थान पुलिस, शहर की फायर सर्विस, एंबुलेंस और मेडिकल रेस्पॉन्स टीमों ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। इन एजेंसियों ने देखी व्यवस्थाएं इस फुल-स्केल एक्सरसाइज में जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (JIAL) के अलावा जिला प्रशासन, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA), एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), राजस्थान पुलिस, शहर की फायर सर्विस, विभिन्न एयरलाइंस के प्रतिनिधि, सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सक और अन्य राज्य और केंद्रीय एजेंसियों ने हिस्सा लिया। सभी एजेंसियों के बीच समन्वय, सूचना के आदान-प्रदान और तुरंत प्रतिक्रिया प्रणाली की प्रभावशीलता को इस अभ्यास के जरिए परखा गया। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार फुल-स्केल एयरोड्रोम इमरजेंसी ड्रिल का उद्देश्य केवल विमान दुर्घटना से निपटने की तैयारी का परीक्षण करना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में सभी संबंधित एजेंसियां बिना किसी भ्रम के एकजुट होकर तेजी से कार्रवाई कर सकें। इस तरह की ड्रिल अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन सुरक्षा मानकों के अनुरूप समय-समय पर आयोजित की जाती है। यात्रियोंं का रखा ध्यान इस दौरान पैसेंजर्स को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पूरी एक्सरसाइज NOTAM (Notice to Airmen) अवधि के दौरान कराई गई। इस दौरान एयरपोर्ट का नियमित संचालन प्रभावित नहीं हुआ और उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहा। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रवक्ता ने बताया- यात्रियों और सभी स्टेकहोल्डर्स की सुरक्षा एयरपोर्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है। फुल-स्केल इमरजेंसी एक्सरसाइज के माध्यम से आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जाती है। ऐसे नियमित अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी, सुरक्षित और त्वरित तरीके से सामना किया जा सके।