जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या और शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम की डिप्टी मेयर सरोज कंवर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर अधिकारियों ने जल्द ही आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो लापरवाही बरतने वाले उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी मेयर ने कहा कि शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु अब गंभीर समस्या बन चुके हैं। इनकी वजह से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं और कई लोगों की जान तक जा चुकी है। ऐसे में इस समस्या को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरोज कंवर ने कहा कि उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को आवारा पशुओं को पकड़ने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बाद शहर के कुछ इलाकों में कार्रवाई भी शुरू हुई, लेकिन यह कार्रवाई अभी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर अब भी बड़ी संख्या में आवारा पशु सड़कों और मुख्य मार्गों पर घूमते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि केवल खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखने चाहिए। जब तक सड़कों से आवारा पशुओं की समस्या खत्म नहीं होती, तब तक कार्रवाई जारी रखनी होगी। आवारा पशुओं से हादसे, लोगों की जान पर खतरा डिप्टी मेयर ने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या केवल यातायात बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ी हुई है। सड़क पर अचानक पशुओं के आ जाने से वाहन चालक संतुलन खो देते हैं और हादसे हो जाते हैं। कई मामलों में लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद यदि अधिकारी गंभीरता नहीं दिखाते हैं तो यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और कार्रवाई में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को जवाब देना होगा। जनता को भी बदलनी होगी आदत शहर की सफाई व्यवस्था पर बात करते हुए सरोज कंवर ने कहा कि जयपुर को स्वच्छ रखना केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आमजन की सहभागिता भी बेहद जरूरी है। जब तक लोग अपनी आदतों में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक शहर को पूरी तरह स्वच्छ बनाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि सफाई की शुरुआत छोटी-छोटी आदतों से करनी होगी। सबसे पहले प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना होगा। खासकर छोटी प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को कम करने की दिशा में लोगों को पहल करनी चाहिए। उन्होंने प्लास्टिक के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि प्लास्टिक पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है। इसके इस्तेमाल को कम करने के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शहर को साफ रखने के लिए केवल सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं रहा जा सकता। गंदगी फैलाने वालों से वसूला जाएगा जुर्माना सरोज कंवर ने कहा कि फिलहाल शहर में गंदगी फैलाने वाले लोगों को समझाइश दी जा रही है, लेकिन अगर इसके बाद भी लोग अपनी आदतों में सुधार नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों से जुर्माना वसूलने का प्रावधान लागू करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि जयपुर में भी सख्ती के बिना सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाना मुश्किल है। उन्होंने विदेशों के उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने को लेकर कड़े नियम हैं। वहां लोग अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। कोई व्यक्ति अपने पालतू जानवर को सड़क पर घुमाते समय उससे गंदगी करवाता है तो उसे खुद सफाई करनी पड़ती है। इसी तरह की जिम्मेदारी और अनुशासन हमारे यहां भी विकसित करना होगा। गुटखा-जर्दा और चिप्स-कुरकुरे के रैपर से फैल रही गंदगी डिप्टी मेयर ने शहर में जगह-जगह फैली गंदगी के लिए लोगों की आदतों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गुटखा-जर्दा खाने वाले लोग सड़कों पर थूककर गंदगी फैलाते हैं। वहीं चिप्स और कुरकुरे जैसे उत्पाद खाने के बाद उनके रैपर सार्वजनिक स्थानों पर फेंक दिए जाते हैं। इससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि सड़कें और सार्वजनिक स्थान किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि पूरे शहर के हैं। इन्हें साफ रखना सभी की जिम्मेदारी है। केवल नगर निगम से सफाई की उम्मीद करने के बजाय नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। सरोज कंवर ने गुटखा-जर्दा और चिप्स-कुरकुरे जैसे उत्पादों को लेकर भी सवाल उठाए और इनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनकी वजह से होने वाली गंदगी को रोकने के लिए सख्ती जरूरी है। उनका कहना है कि जयपुर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए अब समझाइश के साथ-साथ नियमों का सख्ती से पालन भी करवाना होगा। डिप्टी मेयर के इस रुख से साफ है कि नगर निगम अब आवारा पशुओं की समस्या और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि, इस दिशा में वास्तविक बदलाव तभी नजर आएगा, जब अधिकारियों की कार्रवाई नियमित हो और आमजन भी शहर को स्वच्छ रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।