जयपुर के पवित्र तीर्थ गलता जी में हनुमान जी का ऐसा मंदिर है। यहां पिछले 503 वर्षों से अखंड ज्योति निरंतर जल रही है, जो श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि सन 1523 में संत किल दास जी की तपस्या से हनुमान जी की ज्योति प्रकट हुई थी। कहा जाता है कि मूर्ति और अखंड ज्योति दोनों एक साथ प्रकट हुए थे। इस मंदिर में हनुमान जी की एक दुर्लभ प्रतिमा है, जिसमें उनकी भुजाओं पर भगवान राम और लक्ष्मण विराजमान हैं। इसके अलावा, यहां श्रीफल (नारियल) का एक जोड़ा भी है, जिसे लाखों में एक माना जाता है और जिनकी पूजा की जाती है। साथ ही, मंदिर में प्रवेश करने के लिए एक प्राचीन गुफा से गुजरना होता है। अब देखिए, मंदिर से जुड़ी PHOTOS… कामाख्या रूप की झलक मंदिर के पुजारी सत्यनारायण बताते हैं यह मंदिर उस प्रसंग को दर्शाता है जब हनुमान जी अहिरावण का वध कर राम और लक्ष्मण को वापस लाए थे। इसलिए, इस विग्रह में शक्ति और भक्ति का संगम दिखाई देता है, जिसे कुछ लोग कामाख्या स्वरूप से भी जोड़कर देखते हैं। निजी सेवा से जन-आस्था तक सत्यनारायण के अनुसार पहले यह मंदिर केवल निजी सेवा तक सीमित था और यहां पूजा-पाठ संतों द्वारा ही किया जाता था। लेकिन, 1981 में जयपुर में आई भीषण बाढ़ के बाद मंदिर को काफ़ी नुकसान पहुंचा। इसके बाद मंदिर के द्वार सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, और तब से यह आमजन की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। 503 वर्षों से जलती अखंड ज्योति पुजारी सत्यनारायण बताते हैं पिछले 503 वर्षों से लगातार अखंड ज्योति जल रही है। इसी कारण स्थानीय लोग इन्हें 'अखंड ज्योत वाले हनुमान जी' के नाम से जानते हैं। मंदिर में जुड़ा हुआ श्रीफल (नारियल) भी है, जो लाखों में एक माना जाता है और जिसकी पूजा की जाती है। पुजारी सत्यनारायण के अनुसार, इस मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होता है, जैसे वे किसी प्राचीन गुफा में प्रवेश कर रहे हों। यही रहस्यमयी संरचना इस स्थान को और भी दिव्य बनाती है। मंगलवार और शनिवार को यहां भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।