आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर 16 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान गौर गोविंद की सवारी करीब 250 साल पुराने चांदी के रथ में निकाली जाएगी। मंदिर परिसर में सुबह 6 बजे से धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। भगवान की मंदिर परिक्रमा कराई जाएगी। रथयात्रा के बाद मंदिर की टीम भरतपुर जिले के कामां के लिए रवाना होगी। यहां शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक शोभायात्रा निकलेगी। इस परंपरा का संबंध जयपुर और ब्रज क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं से माना जाता है और यह करीब ढाई सौ साल से लगातार निभाई जा रही है। गौर गोविंद की प्रतिमा का विशेष महत्व मंदिर परंपरा के अनुसार, ठाकुर श्री गोविंददेवजी का श्रीविग्रह वृंदावन में श्रील रूप गोस्वामी को प्राप्त हुआ था। इसके बाद श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने स्वरूप के रूप में अष्टधातु से गौर गोविंद का विग्रह तैयार करवाकर वृंदावन भिजवाया। बाद में इस विग्रह को गोविंददेवजी के दाहिने पार्श्व में स्थापित किया गया, जहां यह आज भी विराजमान है। मान्यता है कि बाद में श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के दौरान इसी गौर गोविंद विग्रह में समाहित हो गए। इसी आस्था के आधार पर हर साल रथयात्रा महोत्सव में गौर गोविंद की विशेष पूजा और शोभायात्रा निकाली जाती है। 250 साल पुराने चांदी के रथ में होगी परिक्रमा रथयात्रा के दौरान करीब तीन से चार फीट ऊंचे प्राचीन चांदी के रथ में भगवान गौर गोविंद को विराजमान किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर की चार प्रदक्षिणाएं कराई जाएंगी। इसी परिक्रमा के साथ रथयात्रा महोत्सव संपन्न होगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह परंपरा लगभग 250 साल से लगातार निभाई जा रही है। कामां में भी निकलेगी भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा जयपुर में आयोजन के बाद मंदिर की टीम भरतपुर जिले के कामां पहुंचेगी। यहां शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा निकाली जाएगी। कामां ब्रज क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। यहां वृंदा देवी से जुड़ी मान्यताओं के बीच काष्ठ से निर्मित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के साथ पारंपरिक रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।