राजस्थान में 960 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में अफसरों को जयपुर के एक होटल में बुलाकर रिश्वत बांटी गई थी। घोटाले में शामिल पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं 9 अफसर 17 फरवरी को पकड़े गए थे। अब भी जलदाय विभाग के जितेंद्र शर्मा (तत्कालीन अधिशाषी अभियंता), मुकेश गोयल (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता) और इनका साथी संजीव गुप्ता फरार है। इन्होंने इरकॉन कंपनी के काम का हवाला देते हुए फर्मों को फर्जी सर्टिफिकेट से टेंडर दिलाने में मदद की थी। अब फरार अफसरों की संपत्ति को कुर्क किया जाएगा। पढ़िए- पूर्व IAS और जलदाय विभाग के अफसरों ने कैसे किया घोटाला होटल में बुलाकर बांटे थे घूस के रुपए 1- DIG (एसीबी) डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि 960 करोड़ के जल जीवन मिशन के प्रोजेक्ट में फर्मों को टेंडर दिया जाना था। मेसर्स गणपति ट्यूबवैल और मेसर्स श्याम ट्यूबवैल फर्म के मालिकों पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने जेजेएम संबंधित अफसरों से मिलीभगत कर ली थी। फर्म मालिकों ने अफसरों को सिंधीकैंप स्थित एक होटल में बुलाया और रिश्वत के रुपए बांटे थे। लाखों रुपए लेकर वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट किया था तैयार इस घोटाले में फरार संजीव गुप्ता, जितेंद्र शर्मा (तत्कालीन अधिशाषी अभियंता)और मुकेश गोयल (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता) की तलाश में 260 से ज्यादा जगहों पर दबिश दी जा चुकी है। एसीबी जांच में सामने आया है कि भगौड़े आरोपी एसई मुकेश गोयल ने मुकेश पाठक (इरकॉन में प्राइवेट ऑफिस सहायक) के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया था। मेसर्स श्याम ट्यूबवैल कंपनी के ऑनर महेश मित्तल के कहने पर मुकेश पाठक ने 15 लाख रुपए लेकर इरकॉन के फेक वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट तैयार किया था। PHED की ओर से भेजे सत्यापन ई-मेल का भी जबाव दिया था। अफसरों ने फर्जी सर्टिफिकेट का किया था सत्यापन मेसर्स गणपति ट्यूबवैल और मेसर्स श्याम ट्यूबवैल ने टेंडर के लिए फर्जी सर्टिफिकेट लगाया था। सर्टिफिकेट में इरकॉन के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर पूर्व में काम करने का बताया गया था। जलदाय विभाग के अफसरों ने फेक ई-मेल आईडी बनाकर इस फर्जी सर्टिफिकेट का सत्यापन किया था। फर्जी फर्मों की मिली शिकायत को दबा दिया था DIG (एसीबी) ने बताया कि इससे पहले 16 फरवरी 2023 को इस्कॉन ने फर्मों के फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर तत्कालीन IAS सुबोध अग्रवाल को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी थी। ई-मेल में लिखा गया था कि कंपनी की ओर से इरकॉन के नाम से लगाए गए सर्टिफिकेट फेक है। इस शिकायत को तत्कालीन IAS सुबोध अग्रवाल ने अफसरों के साथ मिलकर दबा दिया था। इसके बाद 9 मई 2023 को फाइनेंशियल कमेटी की ओर से इन फर्मों को कार्यादेश जारी करने का अप्रूव्ल दे दिया था। पूर्व IAS और 9 अफसर पकड़े जा चुके जेजेएम घोटाले में पूर्व सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। वह दिल्ली में हुलिया बदलकर रह रहे थे। करीब 51 दिन बाद ACB ने दिल्ली से अग्रवाल को पकड़ा। बाकी 3 फरार है। भगौड़े तीनों आरोपियों की तलाश में एसीबी टीमें दबिश दे रही है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के साथ ही अब इन तीनों की संपत्ति कुर्क की कार्रवाई की जाएगी। वहीं जलदाय विभाग के 9 अफसर भी 17 फरवरी को पकड़े जा चुके थे। जलदाय विभाग के ये अफसर पकड़े जा चुके- ये खबर भी पढ़िए- 960 करोड़ के घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार:ACB टीम दिल्ली से लेकर जयपुर पहुंची, 3 फरार आरोपियों की संपत्ति करेगी अटैच
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) टीम ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में फरार चल रहे पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। (पढ़िए पूरी खबर)