जयपुर में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश विक्रम नाथ ने कहा- श्रीलंका के प्रधानमंत्री को सावधान और सतर्क रहना चाहिए। श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एएचएम दिलीप नवाज जल्द ही, किसी भी समय उनकी जगह ले सकते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ ने जयपुर में रविवार को कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल्स ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में यह कहा। इसी समारोह में श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एएचएम दिलीप नवाज भी शिरकत कर रहे थे। जस्टिस विक्रम नाथ से पहले जस्टिस नवाज का संबोधन हुआ था। इसके बाद जैसे ही जस्टिस विक्रम नाथ का संबोधन शुरू हुआ। उन्होंने हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज में कहा- अभी हमारे पास एक बहुत ही प्रभावशाली वक्ता थे, जिन्होंने उत्कृष्ट भाषण दिया। उन्होंने वास्तव में हम सभी को प्रभावित कर दिया। मुझे पूरा विश्वास है कि रिटायरमेंट के बाद नवाज कुछ बेहतर करने की तलाश में हैं। वे अपना क्षेत्र बदलकर राजनीति में प्रवेश करने के इच्छुक हैं। श्रीलंका के प्रधानमंत्री की जगह जस्टिस नवाज ले सकते हैं। ऐसा कहने पर जस्टिस नवाज और समारोह में मौजूद सभी लोग ठहाका मारकर हंसने लगे। रिश्तों को बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मीडिएशन जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- मीडिएशन (मध्यस्थता) से विवादों का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान संभव है। सहमति से हुआ समझौता कोर्ट के फैसले से अधिक टिकाऊ होता है। उन्होंने कहा कि जब पक्षकार समाधान पर सहमत होते हैं तो उसका सम्मान भी करते हैं। अपीलों से मुकदमे लंबे चलते हैं, लेकिन मीडिएशन से विवाद समाप्त हो जाते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- आज रिश्तों को बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मीडिएशन ही है। शांति ही मजबूत और भरोसेमंद समाज की नींव है। विश्वास से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव हैं। 2.3 करोड़ मामले मध्यस्थता से सुलझ सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ ने कहा- साल 2026 में देशभर की अदालतों में करीब 2.3 करोड़ मामले ऐसे हैं, जो मध्यस्थता से सुलझ सकते हैं। इनमें वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस, दुर्घटना दावों में मीडिएशन के सफल होने की संभावना सबसे अधिक है। उन्होंने कहा- मामला राजस्थान के किसी गांव का हो या कैरेबियाई देशों का, संवाद और मध्यस्थता से स्थायी समाधान संभव है। मीडिएशन में कोई पक्ष जीतता या हारता नहीं है, बल्कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान तय करते हैं। समझौते से न केवल समय, बल्कि धन की भी बचत होती है। जयपुर पीस मीडिएशन डिक्लेरेशन पारित सम्मेलन के अंतिम दिन जयपुर घोषणा पत्र-2026 (जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मीडिएशन) को अपनाया गया। घोषणा पत्र में मध्यस्थता की न्याय प्रणाली का प्रभावी, सुलभ और मानवीय विकल्प बनाने, सीमा पार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने तथा कॉमनवेल्थ देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। घोषणा पत्र में कहा गया कि शांति, न्याय और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए मध्यस्थता को संस्थागत रूप से बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इसमें कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कम करने, विवादों के जल्द निपटारे और लोगों के लिए न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। एआई के प्रयोग से मध्यस्ता घोषणा पत्र में कहा गया कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करते हुए मध्यस्थता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही मध्यस्थों के प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। समापन सत्र में जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा नायर पटेल, कोर्ट ऑफ अपील बहामास के न्यायाधीश वशीष्ट कोकाराम, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी भी मौजूद रहीं।