लेबर कोर्ट की सख्ती के बाद जयपुर नगर निगम ने अपने यहां कार्यरत रहे श्रमिक को करीब 8 साल बाद हक के पैसे का पुनर्भुगतान कर दिया। जयपुर महानगर द्वितीय की लेबर कोर्ट-प्रथम के जज दिनेश कुमार गुप्ता ने बुधवार को श्रमिक रामकरण के मामले में सुनवाई करते हुए निगम की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणियां की थी। कोर्ट ने गुरुवार को निगम कमिश्नर अथवा उनके प्रतिनिधि को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा था। इसके बाद निगम अधिकारी 2.12 लाख रुपए का चेक लेकर कोर्ट पहुंचे। श्रमिक के अधिवक्ता राकेश बागड़ा ने बताया- श्रमिक रामकरण की 30 जून 2015 को रिटायरमेंट की उम्र पूरी हो गई थी। इसके बावजूद रामकरण से 31 मार्च 2016 तक ड्यूटी करवाई गई। वहीं, इसके बदले भुगतान किए गए वेतन-भत्तों की राशि श्रमिक की सेवानिवृत्ति के समय उपार्जित अवकाश (अर्न लीव) के भुगतान में से कटौती करके वसूल कर ली गई। इसे श्रमिक की ओर से लेबर कोर्ट में चुनौती दी गई थी। निगम की राजा-महाराजाओं की मानसिकता कोर्ट ने निगम की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा था- लोगों के साथ लोकसेवकों का इस तरह का गुलामी जैसा व्यवहार लोकतंत्र को शीर्षासन की मुद्रा में लाने का प्रयास है। ऐसी स्थिति में आमजन में व्यवस्था के प्रति असंतोष उत्पन्न होता है और समाज में अराजकता की स्थिति पैदा होती है। कोर्ट ने कहा था- शासन-प्रशासन में बैठे लोकसेवकों का इस तरह का निंदनीय और असंवेदनशील व्यवहार, नागरिकों को कीड़े-मकोड़े और खुद को राजा-महाराजा समझने की मानसिकता को दर्शाता है। 'काम के बदले दिए वेतन' की वसूली समझ से परे कोर्ट ने कहा- हम काम के बदले दिए गए वेतन की राशि की वसूली किए जाने के पीछे की वजह को समझने में पूरी तरह से असफल हैं। यह और भी तकलीफदायक है कि निगम अपने द्वारा की गई इस कार्रवाई को जायज ठहराने का प्रयास कर रहा है। यह होना चाहिए था कि श्रमिक ने जब 26 मार्च 2018 को लिखित में प्रार्थना पत्र दिया था। उसी समय उसकी कटौती की राशि तुरंत लौटाई जाती। साथ ही दोषी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती। यह खबर भी पढ़ें... कोर्ट बोला-लोगों को कीड़े-मकोड़े, खुद को राजा समझता है नगर-निगम:कर्मचारी के रिटायरमेंट पर मिले रुपयों से सैलरी काटने पर जताई नाराजगी, कमिश्नर से मांगा जवाब जयपुर नगर निगम में कार्यरत श्रमिक (लेबर) को काम के बदले दिए गए वेतन की राशि उसके रिटायरमेंट बेनिफिट (सेवानिवृत्ति परिलाभों) से काटने के मामले में लेबर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। (पूरी खबर पढ़ें)