जयपुर में जलदाय भवन पर तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। कांट्रेक्टर अपने लंबित भुगतान की मांग कर रहे हैं। संघर्ष समिति ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के बैनर तले यह प्रदर्शन किया जा रहा है। ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने कहा- कई बार ज्ञापन देने के बावजूद भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हम पिछले कई महीनों से अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं और अब हमारे पास अपने कर्मचारियों को भुगतान करने या अपने व्यवसायों को चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन राजस्थान में जलदाय विभाग के साथ काम करने वाले ठेकेदारों का एक संगठन है। एसोसिएशन का कहना है कि जलदाय विभाग पर ठेकेदारों का करोड़ों रुपये बकाया है। जलदाय भवन पर ठेकेदारों का अनिश्चितकालीन धरना, भुगतान की मांग जयपुर में जलदाय भवन पर तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। संघर्ष समिति ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों कांट्रेक्टर भुगतान की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठे कांट्रेक्टरों ने आरोप लगाया कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर जलदाय मंत्री को भुगतान के लिए कई बार ज्ञापन देने के बावजूद भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 33 महीनों से भुगतान नहीं, योजनाएं अधर में ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अमर सिंह विश्नोई ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर जल देने की योजना शुरू की। उसके तहत प्रदेश के सभी संवेदकों ने सभी संसाधन लगाकर इस योजना के तहत काम किया और लगभग-लगभग योजनाएं पूरी कीं। लेकिन पिछले 33 महीनों से 3 हजार ठेकेदारों का भुगतान नहीं किया गया है। ₹4500 करोड़ का भुगतान रोका, मजदूरों का खून-पसीना बहा अमर सिंह विश्नोई ने बताया- केंद्र सरकार का हवाला देकर राजस्थान में पीएचईडी के ठेकेदारों के करीब ₹3500 करोड़ जल जीवन मिशन, अमृत-2 और विभिन्न योजनाओं का साथ में ₹1000 करोड़ जीएसटी का भुगतान रोककर रखा गया है और MNP कार्यों के बिल ट्रेजरी से पास होने के बाद वेज मिन्स की ओर से भुगतान रोका हुआ है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह उन मजदूरों की मेहनत है, उन ठेकेदारों का खून-पसीना है, जिन्होंने दिन-रात काम करके जनता तक पानी पहुंचाया। ठेकेदार बेहाल, मजदूरों का भुगतान मुश्किल, हड़ताल की चेतावनी अमर सिंह विश्नोई ने बताया- हम अब तो मजदूरों का भुगतान भी नहीं कर पा रहे हैं। अब तो हमारे मजदूर भी हमारे बस में नहीं हैं, वो भी काम छोड़ चुके हैं। धीरे-धीरे ये स्कीमें बंद होने की कगार पर हैं। गर्मी के समय में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आज हालत यह है कि ठेकेदार अपने मजदूरों को मजदूरी नहीं दे पा रहे, वेंडर्स का भुगतान नहीं कर पा रहे, और कई परिवारों के घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। जिन हाथों ने प्रदेश को पानी दिया, आज वही हाथ खाली हैं। धरने पर बैठे ठेकेदार दिनेश भांटी ने बताया कि जलदाय विभाग से जुड़े 3 हजार ठेकेदारों के ऊपर व्यवसायिक संकट आया हुआ है। हम लोगों को ना केवल बैंकों के ब्याज भरने हैं, बल्कि बैंकों की किस्तें, बैंक गारंटियां चुकानी हैं। 60 प्रतिशत से ज्यादा ठेकेदारों के खाते एनबीए होने के कगार पर हैं। हमसे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े 25 हजार परिवार और 3 लाख लोगों पर आर्थिक संकट आ गया है। ये स्थिति बहुत भयावह है। किसी दिन हमारे मजदूरों ने काम बंद कर दिया तो पीएचईडी को पानी पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश ने बताया कि हमारा बकाया भुगतान 33 महीनों से बाकी है। हम सरकार को चेतावनी देते हैं कि यदि 7 दिन में हमारी मांगें नहीं मानी तो हम जलदाय विभाग के सारे ठेकेदार हड़ताल पर चले जाएंगे, जिससे सारा काम ठप हो जाएगा। ठेकेदारों की मुख्य मांगें: