राजस्थान में आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्राएं निकाली जा रही है। गुरुवार सुबह 6 बजे सबसे पहले गोविंददेवजी मंदिर में रथयात्रा महोत्सव हुआ। गोविंददेवजी मंदिर में 250 साल पुरानी परंपरा के तहत महोत्सव आयोजित किया गया। इस दौरान भगवान गौर गोविंद को प्राचीन चांदी के रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर की चार परिक्रमा कराई गई। वहीं, आज जयपुर और उदयपुर में बड़े आयोजन होंगे। जयपुर में शाम को करीब 5 बजे श्री जगन्नाथ सेवक समिति की पुरी की तर्ज पर भव्य रथयात्रा होगी। वहीं गुप्त वृंदावन धाम में आधुनिक हाइड्रोलिक रथ पर शोभायात्रा निकाली जाएगी। उदयपुर शहर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे बड़ी यात्रा निकलेगी। यहां मंदिर स्थापना के बाद इतिहास में पहली बार 375 साल पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को भी इस यात्रा में शामिल किया जाएगा। उदयपुर में भगवान जगन्नाथ स्वामी चांदी के रजत रथ पर माता लक्ष्मी और दानीराय जी के साथ विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस रथ का कुल वजन 95 किलो है। अलवर शहर में 22 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। भगवान 196 साल पुराने इंद्र विमान पर विराजमान होकर विवाह करने निकलेंगे। रथयात्राओं के दौरान इन शहरों में ट्रैफिक भी डायवर्ट रहेगा। इस रिपोर्ट में पढ़िए- रथयात्राओं का आकर्षण और उनका विशेष रूट क्या रहेगा? 1. गोविंददेवजी मंदिर में 250 साल पुरानी परंपरा निभाई गई जयपुर में 16 जुलाई को सुबह 6 बजे गोविंददेवजी मंदिर में रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत हुई। करीब 250 साल पुराने तीन से चार फीट ऊंचे चांदी के रथ में गौर गोविंद को विराजमान कर मंदिर परिसर की चार परिक्रमा कराई गई। इसके बाद मंदिर की टीम भरतपुर जिले के कामां के लिए रवाना हुई, वहां शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक शोभायात्रा निकाली जाएगी। कामां में काष्ठ से निर्मित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के साथ रथयात्रा निकलेगी। 2. जगन्नाथ सेवक समिति की रथ यात्रा गोविंददेवजी मंदिर से निकलेगी जयपुर में 16 जुलाई को ही शाम 5 बजे श्री जगन्नाथ सेवक समिति की ओर से रथयात्रा गोविंददेवजी मंदिर से रवाना होगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा दिव्य रथ पर सवार होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। समिति ने इस साल आयोजन के लिए करीब 30 लाख रुपए का बजट मंजूर किया है। 29 जून से शुरू हुए उत्सव, 27 जुलाई तक चलेंगे समिति के अनुसार रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत स्नान पूर्णिमा से हो चुकी है। यह धार्मिक आयोजन 27 जुलाई तक जारी रहेगा। जयपुर में भगवान जगन्नाथ से जुड़े अधिकांश उत्सव पुरी की परंपरा के अनुसार मनाए जाते हैं। गोवर्धन मठ की परंपरा पर होगी कथा नौ दिवसीय महोत्सव के दौरान गोवर्धन मठ, पुरी की शंकराचार्य परंपरा से जुड़े संत शिवमणि त्रिपाठी महाराज श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ की महिमा, रथयात्रा के आध्यात्मिक महत्व और सनातन संस्कृति पर आधारित कथा सुनाएंगे। 3. गुप्त वृंदावन धाम निकालेगा हाइड्रोलिक रथयात्रा जयपुर के गुप्त वृंदावन धाम की ओर से भी 16 जुलाई की शाम 5.30 बजे भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विशेष रिमोट आधारित हाइड्रोलिक रथ पर विराजमान होंगे। रथ को पुरी की परंपरा के अनुसार लाल और पीले वस्त्रों से सजाया गया है। रथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिजली के तारों से बचाने के लिए इसकी ऊंचाई जरूरत के अनुसार कम और ज्यादा की जा सकेगी। जयपुर में इन रास्तों पर रहेगा डायवर्जन जलेबी चौक मार्ग बंद: रथयात्रा शुरू होने से पहले जलेबी चौक की ओर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। बड़ी चौपड़ पर डायवर्जन: रथयात्रा के बड़ी चौपड़ पहुँचने तक सुभाष चौक, चार दरवाजा, रामगंज चौपड़ और त्रिपोलिया की ओर से आने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा। त्रिपोलिया गेट मार्ग: रथयात्रा के त्रिपोलिया गेट पहुँचने से पहले न्यू गेट और छोटी चौपड़ की ओर से आने वाले वाहनों को भी अन्य मार्गों की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। छोटी चौपड़ मार्ग: रथयात्रा के छोटी चौपड़ पहुँचने से पहले अजमेरी गेट, चौगान चौराहा और संजय सर्किल से छोटी चौपड़ की ओर किसी भी प्रकार का ट्रैफिक नहीं जाने दिया जाएगा। पार्किंग और भारी वाहनों पर प्रतिबंध नो-पार्किंग ज़ोन: शाम 4:00 बजे से हवामहल बाज़ार, जौहरी बाज़ार और त्रिपोलिया बाज़ार में सभी प्रकार के वाहनों की पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित (नो-पार्किंग) रहेगी। परकोटे में नो-एंट्री: शाम 4:00 बजे से ही घाटगेट, बड़ी चौपड़, रामगढ़ मोड़, सांगानेरी गेट, अजमेरी गेट, संजय सर्किल और गलता गेट से टेंपो, मिनी बस, सिटी बस और अन्य मध्यम श्रेणी के वाहनों का परकोटा क्षेत्र में प्रवेश बंद रहेगा। बसों के लिए वैकल्पिक मार्ग सांगानेरी गेट से आमेर जाने वाली बसें: सांगानेरी गेट से बड़ी चौपड़ होकर जाने वाली मिनी और सिटी बसों को घाटगेट, ट्रांसपोर्ट नगर, दिल्ली बायपास, धोबी घाट और रामगढ़ मोड़ होते हुए आमेर की ओर भेजा जाएगा। संजय सर्किल से रामगंज-आमेर जाने वाली बसें: संजय सर्किल से रामगंज और आमेर जाने वाली बसों का संचालन एमआई (MI) रोड, घाटगेट, ट्रांसपोर्ट नगर, दिल्ली बायपास, धोबी घाट और रामगढ़ मोड़ के रास्ते किया जाएगा। 4. उदयपुर में चांदी के रथ पर सवार होंगे उदयपुर में 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा निकाली जाएगी। जो दोपहर 3 बजे शुरू होगी। इस बार भी रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ स्वामी चांदी के रथ पर माता लक्ष्मी और दानीराय जी के साथ विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस रथ का कुल वजन 95 किलो है। भगवान के स्वागत के लिए पूरे रथयात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं के घरों की छतों पर 11 हजार ध्वजा-पताकाएं (झंडे) लगाई जाएंगी। रथयात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी। इसके साथ ही पांच अलग-अलग बैंड, भजन मंडलियां, ऊंट-घोड़े और शाही लवाजमा इस यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए शामिल होंगी, जबकि श्रद्धालु भक्त संगीत और जयघोष के बीच नृत्य करते हुए नजर आएंगे। इस बार पुणे से विशेष श्रद्धालु आए हैं, जो पूरे रास्ते पर भव्य रंगोलियां बनाएंगे। फूलों और मोतियों से सजे रथ को खींचने के लिए आम भक्त ही वीआईपी की तरह सारी रस्में निभाते हैं। साथ ही एक और बड़ी परंपरा 70 साल बाद फिर से शुरू होगी। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की ओर से भगवान जगन्नाथ को खास शाही पोशाक धारण करवाई जाएगी। सिटी पैलेस से पारंपरिक ठाट-बाठ के साथ यह पोशाक गुरुवार शाम को मंदिर लाई गई। पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ छेरा पहरा यानी बुहारने की रस्म निभाकर रथयात्रा में महाआरती करेंगे। पुणे से आए श्रद्धालु रास्ते में बनाएंगे रंगोलियां इस्कॉन और जगन्नाथ धाम की रथयात्राओं में इस बार कई नए रंग देखने को मिलेंगे। गंगू कुंड इस्कॉन मंदिर की रथयात्रा के पूरे मार्ग को अलौकिक लुक देने के लिए पुणे से विशेष श्रद्धालु उदयपुर आए हैं। यह श्रद्धालु पूरे रास्ते पर भव्य और खूबसूरत रंगोलियां उकेरेंगे। इस यात्रा में पहली बार आधुनिक तकनीक वाली धार्मिक डिजिटल झांकियां भी शामिल की जाएंगी, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। वहीं, सेक्टर-7 के जगन्नाथ धाम में रथयात्रा के ठीक 7 दिन बाद भगवान को रसगुल्ले का विशेष महाभोग लगाया जाएगा, जो पूरी यात्रा को संभाग में सबसे अनूठी पहचान दे रहा है। 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का इंतजाम रथयात्रा में शामिल होने वाले भक्तों के लिए बड़े पैमाने पर भोजन और प्रसादी की व्यवस्था की गई है। आसींद की हवेली पार्किंग में जगन्नाथ अन्न क्षेत्र मानव समिति की तरफ से करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी (भोजन) का इंतजाम रहेगा। उदयपुर में इन रास्तों पर रहेगा डायवर्जन उदयपुर में नो व्हीकल और नो पार्किंग जोन शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आरएमवी रोड पर सूरजपोल थाना के सामने नो व्हीकल जोन रहेगा। वहीं कालाजी-गोराजी तिराहे से गुलाबबाग रोड स्थित बर्फ फैक्ट्री से उदियापोल तक नो पार्किंग जोन घोषित किया गया है। आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के दोपहिया वाहन आरएमवी स्कूल परिसर में पार्क किए जाएंगे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी। नो पार्किंग क्षेत्र में खड़े वाहनों को क्रेन की सहायता से हटाया जाएगा। आमजन से मुख्य सड़कों पर वाहन पार्क नहीं करने और यातायात पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई है। 5. अलवर में 196 साल पुराना है भगवान का विमान अलवर में 22 जुलाई को सुभाष चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकाली जाएगी। मंदिर के महंत पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि रथयात्रा में श्रद्धालु भगवान के बाराती बनकर शामिल होंगे। यात्रा में हरियाणा का प्रसिद्ध बमरसिया नृत्य, पांच शंखवादक, 16 सदस्यीय घड़ियाल पार्टी, करतब दिखाते पट्टेबाज, ऊंट-घोड़े, बैंड, पुलिस बैंड, ताशा पार्टी, शहनाई वादन, प्याऊ तथा आकर्षक धार्मिक झांकियां शामिल रहेंगी। 196 साल पुराने इंद्र विमान पर विराजमान होकर जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा निकाली जाएगी। दुबई से आए कपड़े की पोशाक धारण करेंगे भगवान महंत ने बताया कि दुबई निवासी एक श्रद्धालु हर साल भगवान श्री जगन्नाथ के लिए विशेष पोशाक भेजते हैं। इस बार भी दुबई से कपड़ा भेजा गया है, जिससे जयपुर में भगवान की पोशाक तैयार की जा रही है। भगवान के लिए विदशों से इत्र भी भेजे गए हैं। 6. जोधपुर में 350 साल पुराना मंदिर, चंदन की लकड़ी से बनी है प्रतिमा जोधपुर शहर में गुरुवार को जगन्नाथ यात्रा निकाली गई। सुनारों की घाटी स्थित जगदीश मंदिर में विराजित भगवान जगन्नाथ के शृंगार के लिए नाथद्वारा से मुकुट और पोशाक मंगवाई गई। साथ ही जगन्नाथपुरी से चावल-भात का प्रसाद और ध्वजा लगाई गई। मंदिर के पुजारी गौरव गौड़ ने बताया- ये मंदिर करीब 350 साल पुराना है। हमारे पूर्वज जगन्नाथ पुरी से इसे लेकर आए थे। प्रतिमा चंदन की लकड़ी से बनी है। सुबह 121 किलो पंच मेवे का भोग लगाया गया। रथयात्रा के लिए अजमेर से रथ मंगाया है। ये रथ सोने जैसे रंग में रंगा था। साथ ही रथयात्रा में होने वाला शृंगार नाथद्वारा के श्रीनाथजी के स्वरूप जैसा दिया गया। इसके लिए पोशाक और मुकुट समेत अन्य शृंगार भी नाथद्वारा से मंगवाया गया। इसके अलावा रथ को सजाने के लिए 200 किलो फूल कोलकाता से मंगवाए गए।