रोडवेज में एजेंसी के जरिए कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे ड्राइवर्स ने यह व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन करेंगे। ड्राइवरों ने कहा- हमें एजेंसी के जरिए भुगतान करने के बजाय रोडवेज सीधे हमारे खाते में पैसा दे। इसी मांग को लेकर 27 अक्टूबर को रोडवेज मुख्यालय पर प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने आरोप लगाया कि मौजूदा एजेंसी ने हर ड्राइवर से सिक्योरिटी के नाम पर 15 हजार रुपए लिए हैं। एक साल बीतने के बाद भी इसकी रसीद नहीं दी गई। रकम भी वापस नहीं की गई। शर्मा का आरोप है कि रसीद मांगने वाले कुछ ड्राइवरों को बिना कारण बताए ब्लैकलिस्ट कर नौकरी से हटा दिया गया। पहले की एजेंसियों पर भी शिकायत प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने बताया- रोडवेज में ड्राइवर साल 2005 से एजेंसियों के जरिए काम कर रहे हैं। संगठन ने पहले काम कर चुकी दो एजेंसियों पर ड्राइवरों के वेतन से पीएफ और ईएसआई की रकम काटने के बाद उसे जमा नहीं कराने की शिकायत की थी। संगठन का दावा है कि शिकायत के बाद दोनों एजेंसियों को डिफॉल्टर घोषित कर पेनल्टी लगाई गई। सीधे भुगतान की कमेटी रिपोर्ट लागू करने की मांग राजस्थान ठेका श्रमिक संघर्ष समिति के संयोजक कालूराम गर्ग ने कहा- ड्राइवरों को सीधे भुगतान करने की व्यवस्था को लेकर रोडवेज प्रबंधन ने पहले कमेटी बनाई थी। कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंप चुकी है, लेकिन उस पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। बैठक में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री आनंद प्रताप सिंह, संविदा चालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष किशोर कुमार विश्नोई और फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण शर्मा समेत अलग-अलग संभागों से करीब 50 ड्राइवर प्रतिनिधि मौजूद रहे। संगठन ने कहा- 27 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन में रोडवेज में एजेंसी के जरिए काम कर रहे ड्राइवर और बस सारथी शामिल होंगे।