कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा- सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है। सरकार ने वांगचुक से गांधीवादी तरीके से बातचीत करने के बजाय जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। पायलट ने कहा- वांगचुक की मांगों पर विचार किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। पायलट ने आरोप लगाया कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस मुद्दे को दबाने के लिए यह कार्रवाई की गई। यह लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा हनन है और देश का हर युवा इस घटनाक्रम से दुखी है। पायलट ने कहा- कांग्रेस लगातार छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रही है। राहुल गांधी भी युवाओं से संवाद कर रहे हैं और देश का नौजवान सरकार से जवाब मांग रहा है। इसके बावजूद सरकार संवाद करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने में लगी हुई है। सचिन पायलट जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एनएसयूआई की ओर से आयोजित छात्र संविधान संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी मौजूद रहें। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर शिक्षा, पेपर लीक और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लेना चाहती सरकार पायलट ने कहा- पूरे देश में भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोश है। छात्र जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इस्तीफा लेने के बजाय विरोध कर रहे लोगों को जबरन हटाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का कोई प्रतिनिधि सोनम वांगचुक से मिलकर बातचीत करता और उनकी मांगों पर चर्चा करता तो समाधान निकल सकता था लेकिन बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन उठाकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। पायलट ने कहा कि सरकार को पहले उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, जिनको लेकर वांगचुक अनशन पर बैठे थे। अगर मांगें मान ली जातीं तो वे खुद अनशन समाप्त कर देते। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना जरूरी सचिन पायलट ने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसे बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्र जवाबदेही चाहते हैं और सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस का रुख पूरी तरह साफ है कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सरकार को इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर भी साधा निशाना पायलट ने राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव इसलिए नहीं करा रही क्योंकि उसे जनादेश अपने खिलाफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भी इस मामले में पहले टिप्पणी कर चुका है, लेकिन सरकार हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर चुनाव टाल रही है। UPSC जैसा मॉडल अपनाने की सलाह कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पेपर लीक की घटनाओं पर सवाल पूछे। इस पर सचिन पायलट ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे पारदर्शी परीक्षाओं में शामिल है और आज तक उसके पेपर लीक होने की खबर नहीं आई। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूपीएससी की कार्यप्रणाली और स्वायत्त व्यवस्था है। उसी तर्ज पर अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए भी स्वतंत्र और मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। अगर सरकार इच्छा शक्ति दिखाए तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि पेपर लीक कर सके। उन्होंने भाजपा सरकार के कार्यकाल में छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों का भी मुद्दा उठाया। पायलट ने कहा कि जो मुकदमे प्रतिशोध या दुर्भावना से दर्ज किए गए हैं, कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें हटाया जाएगा। टीकाराम जूली ने संविधान और लोकतंत्र पर जताई चिंता नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की मजबूती का आधार संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान की संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने राजनीतिक दलों को तोड़ने, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनाव आयोग और सूचना के अधिकार (RTI) जैसे कानूनों को कमजोर करने के आरोप लगाए। जूली ने कहा कि राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव टालना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक वहां कैसे पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शहीदों के नाम पर राजनीति की है। 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि संगठन देशभर में छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहा है और छात्र सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री अभी भी पद पर बने हुए हैं, जबकि छात्र लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई छात्र या संगठन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करता है तो उसे जबरन हटाया जा रहा है, जैसा दिल्ली में देखने को मिला। जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई पहले देशभर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद 9 अगस्त को दिल्ली चलो अभियान चलाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।