राजधानी जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक बनाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने कई बड़े फैसले लिए हैं। बुधवार को विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में आयोजित 96वीं ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ खाली कराने, एआई आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग, फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग और एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान (ATMP) लागू करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। 1. फुटपाथों से हटेंगे अवैध डेयरी बूथ और अतिक्रमण बैठक में सबसे अधिक जोर पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर दिया गया। तय किया गया कि शहर के फुटपाथ केवल पैदल चलने वालों के लिए ही रहेंगे। फुटपाथों पर बने अवैध डेयरी बूथ, दुकानों के अतिक्रमण, रैंप, सीढ़ियां और अन्य निर्माणों को हटाने के लिए जेडीए की प्रवर्तन शाखा विशेष अभियान चलाएगी। 2. लागू होगा एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान (ATMP) शहर में पहली बार ATMP लागू किया जाएगा। इसके तहत पूरे क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन होगा। प्रमुख मार्गों पर बाधारहित फुटपाथ विकसित होंगे, सड़क और फुटपाथ के बीच ग्रीन मेश फेंस (जालियां) लगाई जाएंगी और रात में सुरक्षा के लिए लो-लेवल लाइटिंग होगी। साथ ही साइकिल ट्रैक, ओपन जिम और बैठने की जगह भी विकसित की जाएगी। 3. आंतरिक सड़कें होंगी सिग्नल-फ्री, मॉल्स के बेसमेंट में केवल पार्किंग सिग्नल-फ्री सड़कें: प्रमुख चौराहों पर आधुनिक राउंड अबाउट (रोटरी) विकसित किए जाएंगे, जिससे बिना ट्रैफिक सिग्नल के वाहन आसानी से निकल सकें। मॉल पार्किंग पर सख्ती: प्रमुख मॉल्स की बेसमेंट पार्किंग में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को हटाकर उन्हें केवल पार्किंग के लिए आरक्षित किया जाएगा। होटलों और अस्पतालों के अवैध रैंप भी हटाए जाएंगे। फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग: फ्लाईओवर के नीचे खाली जगहों को व्यवस्थित पार्किंग के रूप में विकसित करने के साथ हेरिटेज थीम पर उनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। 4. ई-रिक्शा के लिए 7 जोन और महिलाओं के लिए SOS अलर्ट
शहर के करीब 50 हजार ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए जयपुर को सात जोनों में बांटा जाएगा। यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ई-रिक्शा के क्यूआर कोड में 'SOS अलर्ट' सुविधा जोड़ी जाएगी, ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। 5. हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम: स्क्रीन पर दिखेगा पेंडिंग चालान
यातायात प्रबंधन को हाईटेक बनाने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान होगी। साथ ही प्रमुख चौराहों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर वाहनों के लंबित (पेंडिंग) चालानों की जानकारी दिखाई जाएगी। इसके अलावा, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए वॉशरूम की सुविधा वाले नए हेरिटेज डिजाइन के पुलिस बूथ बनाए जाएंगे। बैठक में ये रहे मौजूद: बैठक में राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त अरविंद पोसवाल, जेडीए सचिव गौरव सैनी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) प्रदीप मोहन शर्मा, उप महानिरीक्षक पुलिस आनंद शर्मा सहित नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, स्मार्ट सिटी और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।