पाकिस्तान बॉर्डर से सटे जिलों में संदिग्ध फंडिंग से जमीनों की खरीद की एजेंसियां जांच कर रही हैं। जैसलमेर में इनकम टैक्स विभाग की रेड के बाद भास्कर टीम ने पड़ताल की। इस दौरान तीन रजिस्ट्रियां हमारे हाथ लगीं, जिसमें प्राइम लोकेशन पर बेहद कम कीमत पर प्रॉपर्टी की डील हुई। पूरा भुगतान नकद करने के बावजूद रजिस्ट्री कर दी गई। मार्केट जानकारों के अनुसार यहां 50 लाख तक की कीमत वाली जमीनों की कीमत राजिस्ट्री में 5 से 6 लाख बताई जा रही है। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 मई 2026 को बीकानेर दौरे के दौरान सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माण, ब्लैक मनी और संदिग्ध फंडिंग की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद जैसलमेर, बाड़मेर सहित कई सीमावर्ती जिलों में केंद्रीय एजेंसियां जांच में जुटी हैं। इन अवैध फंडिंग वाले जमीन सौदों के पीछे का काला सच क्या है? कैसे ये जमीन रजिस्ट्रियां हुईं? पढ़िए इस रिपोर्ट में सबसे पहले इन 3 रजिस्ट्रियों से समझिए कैसे हुई सौदेबाजी? रजिस्ट्री-1 : पांच लाख कैश में खरीदा, वर्तमान कीमत 60 लाख से ज्यादा जैसलमेर की जवाहरलाल नेहरू आवासीय योजना में 25x50 (1250 स्क्वायर फीट) का प्लॉट नंबर D-286 के मालिक हनुमान सिंह ने पूर्व पार्षद मगा राम को 5 लाख कैश में बेचा। चौंकाने वाली बात ये है कि 4 अक्टूबर 2024 को उप पंजीयक कार्यालय जैसलमेर ने बिना जांच इसकी रजिस्ट्री भी जारी कर दी। जबकि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269ST के तहत राजस्थान में किसी भी प्रॉपर्टी में 2 लाख से ज्यादा कैश का लेन देन नहीं कर सकते। 2 लाख से ज्यादा का भुगतान चेक या अकाउंट (यूपीआई या बैंक) में ट्रांसफर के जरिए ही हो सकता है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि 2024 में इस कॉलोनी की डीएलसी रेट 5000 प्रति स्क्वॉयर मीटर (अधिकतम) थी। इस लिहाज से तब भी इस प्लॉट की डीलएलसी रेट 5 लाख 80 हजार रुपए से ज्यादा बनती है। हालांकि, मार्केट के जानकारों का कहना है कि इस पॉश कॉलोनी में इतने बड़े प्लॉट की वर्तमान कीमत 50 लाख से ज्यादा है। रजिस्ट्री-2 : कैश में भुगतान, फिर भी रजिस्ट्री जारी जवाहरलाल नेहरू आवासीय योजना में 4 अक्टूबर 2024 को ही एक और प्लॉट नंबर C-502 भगवान सिंह ने दीपेंद्र सिंह नाम के एक ग्राहक को 5 लाख में बेचा। सारा लेनदेन कैश में हुआ। एक भी पैसा बैंक या फिर किसी रिकॉर्ड माध्यम से नहीं हुआ। उप पंजीयन कार्यालय जैसलमेर ने इसकी भी रजिस्ट्री जारी कर दी। यह प्लॉट 30x60 यानि की 167 स्क्वॉयर मीटर का था। जिसकी कीमत डीएलसी दर 5000 प्रति स्क्वॉयर मीटर (अधिकतम) के अनुसार 8 लाख से ज्यादा की बनती है। रजिस्ट्री-3 : प्लॉट की बाजार कीमत 70 लाख, सौदा 5 लाख में जैसलमेर की लक्ष्मीचंद सांवल आवासीय योजना में 30x60 का प्लॉट नंबर D-92 शैतान सिंह ने गोविंद सिंह को 5 लाख रुपए कैश में बेचा। उप पंजीयन कार्यालय जैसलमेर से 21 फरवरी 2025 को हुई इस खरीद की रजिस्ट्री जारी हुई। इस डील में भी सारा लेनदेन कैश में हुआ। प्रॉपर्टी बाजार में इसकी वर्तमान कीमत 70 लाख रुपए बताई जाती है। रजिस्ट्रियों में नियम तोड़े, संदिग्ध और ब्लैक मनी की आशंका नियम : ब्लैक मनी और नकद लेन-देन पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269ST काम करती है। इसके तहत कोई भी शख्स, फर्म या कंपनी किसी भी जमीन के सौदे में 2 लाख या उससे ज्यादा की राशि नकद में नहीं स्वीकार कर सकती है। हकीकत : भास्कर को मिले रजिस्ट्री के तीनों दस्तावेज में कैश का लेनदेन दिखाया गया है। एक भी पैसा बैंक के माध्यम से नहीं दिया गया। नियम : जमीन खरीद के मामलों में उप पंजीयक को अगर किसी रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट 2 लाख या इस से ज्याद कैश का जिक्र मिलता है तो उसे इसकी सूचना आयकर विभाग को अनिवार्य रूप से देनी होती है। राजस्थान सरकार ने भी प्रॉपर्टी ट्रांसफर में 2 लाख व इस से ज्यादा नगद लेनदेन पर सख्ती का सर्कुलर जारी किया हुआ है। हकीकत : सूचना मिली होती तो आयकर विभाग उसकी जांच करता। रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट देखने से ये पता चलता है कि इन मामलों में इस नियम की अनदेखी की गई। सैकड़ों रजिस्ट्रियां फर्जी-आयकर विभाग आयकर अधिकारियों की मानें तो साल 2024-25 व 2025-26 में ही इस तरह के सैकड़ों रजिस्ट्रियां संदिग्ध पाई गई हैं। कई रजिस्ट्रियों में खरीददार व बेचानकर्ता के पैन कार्ड नंबर तक नहीं लिखे गए हैं। कुछ रजिस्ट्रियों में गलत पैन नंबर भी लिखे गए हैं ताकि लेनदेन और सौदे कभी पकड़ में ही न आ पाए। आयकर विभाग ने भी बॉर्डर से सटे इलाकों में ब्लैक और संदिग्ध तरीके से आई कमाई से खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते रेड की थी। जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में सैकड़ों रजिस्ट्रियों की शीट तैयार की है। तहसीलदार बोले- मेरी पोस्टिंग नहीं, ये पुराने मामलों की जांच जैसलमेर तहसीलदार राजेंद्र करण ने ऑफ कैमरा बताया कि उनकी यहां नई पोस्टिंग है, वहीं आयकर विभाग की जांच पुरानी रजिस्ट्रियों के मामले में हुई है। फिलहाल ये इन्वेस्टिगेशन चल रही है, ऐसे में इस मामले में ज्यादा कुछ बताना संभव नहीं हैं। रजिस्ट्रेशन का काम देखने वाले खानुराम नाम के कर्मचारी ने ऑफ कैमरा बताया कि साल 2024-25 व साल 2025-26 की कई रजिस्ट्रियों में खरीददार व बेचानकर्ता के पैन नंबर या तो गलत लिखे गए हैं या लिखे ही नहीं गए हैं। वहीं डील भी कैश में दिखाई गई है। रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड जब्त किया इनकम टैक्स इंस्पेक्टर पारस प्रकाश ने बताया कि ये सारी कार्रवाई उदयपुर से आई टीम ने की थी। जैसलमेर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम उनके सपोर्ट में साथ थी। फिलहाल संदिग्ध रजिस्ट्रियों की सारी इन्फॉर्मेशन जुटा ली गई है। आगे की कार्रवाई इस मामले में उच्च अधिकारी ही करेंगे। अब इन मामलों में क्या कार्रवाई हो सकती है? सीए अनूप भाटिया ने बताया कि भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269ST के उल्लंघन यानि कि इस तरह के जमीन सौदों में 2 लाख या 2 लाख से अधिक के नगद लेनदेन में बेचने वाले पर 100 फीसदी पेनल्टी का प्रावधान है। वहीं खरीदने वाले वाले की टैक्स डिपार्टमेंट आयकर पड़ताल करता है। खरीददार से डील की वेल्यू का 70 फीसदी टैक्स वसूलने और 10 फीसदी पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। …. इनकम टैक्स की छापेमारी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर जमीनों की अवैध रजिस्ट्रियां:इनकम टैक्स विभाग ने 50 फाइलें जब्त की; ब्लैक मनी-अवैध फंडिंग की भी जांच पाकिस्तान बॉर्डर से सटे जैसलमेर जिले में संदिग्ध भूमि सौदों और अवैध फंडिंग की जांच तेज हो गई है। इनकम टैक्स (आयकर) विभाग की 8 सदस्यीय टीम ने उप रजिस्ट्रार कार्यालय में रेड की। पूरी खबर पढ़िए…