जैसलमेर के रेगिस्तान में राज्य पक्षी गोडावण संरक्षण अभियान ने एक उपलब्धि हासिल की है। रामदेवरा और सम ब्रीडिंग सेंटर में हाल ही में दो नए चूजों के जन्म के साथ इन सेंटर्स में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर 86 हो गई है। खास बात यह है कि ये सभी सफलताएं आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन (AI) जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से संभव हुई हैं, जिसके जरिए अब तक 26 चूजों का जन्म हो चुका है। गोडावण को जंगल में छोड़ने से पहले विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए रामदेवरा सेंटर में एक विशेष टनल (सुरंगनुमा संरचना) बनाई जा रही है, जहां छोटे गोडावणों को प्राकृतिक माहौल में पाला जाएगा। रामदेवरा और सम सेंटर में अलग-अलग तारीखों पर जन्म गोडावण संरक्षण केंद्रों में रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में 10 मई को और सम सेंटर में 11 मई को नन्हें चूजों ने जन्म लिया। दोनों ही चूजे AI तकनीक के जरिए पैदा हुए हैं। अब तक इस तकनीक से कुल 26 गोडावण चूजों का जन्म हो चुका है। वर्तमान में रामदेवरा सेंटर में 61 और सम सेंटर में 25 गोडावण सुरक्षित रूप से रखे गए हैं। सेंटर में बढ़ रहा कुनबा, फील्ड में अब भी चुनौती वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रीडिंग सेंटर्स में इस साल अब तक 18 चूजों का जन्म हो चुका है, जिनमें 13 AI तकनीक से, 4 प्राकृतिक तरीके से और 1 फील्ड से लाए गए अंडे से हुआ है। वहीं वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार खुले जंगलों में लगभग 128 गोडावण मौजूद हैं, लेकिन पूरे साल में वहां केवल 2 चूजों का ही जन्म दर्ज किया गया है। इस अंतर को कम करने के लिए ब्रीडिंग सेंटर्स को और मजबूत किया जा रहा है।