जैसलमेर जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार व्यवस्था में आज रात 12 बजे से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम और स्वरूप बदलकर अब वीबी-जीरामजी किया जा रहा है। जिले में चल रहे पुराने कार्यों को नए पोर्टल पर शिफ्ट करने और नए मस्टररोल जारी करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन का दावा है कि श्रमिकों को काम में किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। 3 हजार से ज्यादा काम नई योजना में होंगे ट्रांसफर नई व्यवस्था लागू होने के बाद जैसलमेर जिले में मनरेगा के तहत चल रहे 3 हजार से अधिक कार्यों को वीबी-जीरामजी योजना में ट्रांसफर किया जाएगा। पूरे राजस्थान में करीब 6 लाख नए काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इनमें जैसलमेर जिले में भी हजारों नए विकास कार्य शामिल होंगे। मरुस्थलीय क्षेत्र होने के कारण जिले में नाडी खुदाई, ग्रेवल सड़क, टांका निर्माण और खेल मैदान जैसे कार्यों पर ज्यादा फोकस रहेगा। श्रमिकों को काम में नहीं आएगी रुकावट जिला परिषद प्रशासन के अनुसार, नए मस्टररोल पहले से तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि बुधवार सुबह काम पर पहुंचने वाले श्रमिकों को किसी तकनीकी परेशानी या रुकावट का सामना नहीं करना पड़े। प्रशासन ने सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 2.25 लाख सक्रिय श्रमिकों को मिलेगा रोजगार राजस्थान में करीब 98 लाख सक्रिय श्रमिक इस योजना से जुड़े हुए हैं। इनमें जैसलमेर जिले के करीब 2.25 लाख सक्रिय श्रमिक शामिल हैं। सीमावर्ती जिला होने के कारण जैसलमेर में रोजगार के दूसरे साधन कम हैं। ऐसे में वीबी-जीरामजी योजना यहां के हजारों परिवारों के लिए आजीविका का प्रमुख साधन बनी रहेगी। ऑनलाइन हाजिरी को लेकर नए नियम संभव नई व्यवस्था में ऑनलाइन हाजिरी (NMMS) और पारदर्शिता को लेकर कुछ नए दिशा-निर्देश लागू किए जा सकते हैं। इसे देखते हुए ग्राम विकास अधिकारियों और कनिष्ठ तकनीकी सहायकों को विशेष रूप से जानकारी दी गई है, ताकि नई व्यवस्था को आसानी से लागू किया जा सके। 1200 करोड़ के बजट से विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार राजस्थान को इस योजना के लिए 1200 करोड़ रुपए का बजट मिला है। इसमें से जैसलमेर जिले को भी बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद है। इस बजट से ग्रामीणों को समय पर मजदूरी का भुगतान करने के साथ-साथ जिले की सुदूर ढाणियों और सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी। आज रात 12 बजे के बाद जिले के सभी विकास अधिकारी (बीडीओ) और सरपंच नए फॉर्मेट के तहत ही मस्टररोल और वित्तीय मंजूरी जारी कर सकेंगे।