सरहदी जिले जैसलमेर में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए कल यानी 24 अप्रैल (शुक्रवार) को एक बड़ा मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास किया जाएगा। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने कलेक्ट्रेट सभागार में हुई रिव्यू मीटिंग के बाद जिलेवासियों से इस एक्सरसाइज के दौरान पैनिक न करने और एक रिस्पांसिबल सिटीजन की तरह सहयोग करने की अपील की है। सायरन बजते ही बंद करनी होगी लाइट्स कलेक्टर ने बताया कि यह अभ्यास केवल प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि आम जनता को इमरजेंसी के लिए तैयार करने का एक मौका है। ड्रिल के दौरान जैसे ही 5 मिनट का सायरन बजेगा, इसे 'हवाई हमले' का संकेत माना जाएगा। सायरन सुनते ही सभी को अपने घरों, दुकानों और शोरूम की बिजली, इनवर्टर, जनरेटर और मोबाइल टॉर्च तक बंद करनी होगी। सड़कों पर चल रहे वाहनों की लाइट और हाईवे की हाईमास्ट लाइट्स को भी तुरंत बंद करना अनिवार्य होगा। 15 मिनट का होगा टोटल ब्लैकआउट प्रशासन के अनुसार, ब्लैकआउट की कुल ड्यूरेशन करीब 15 मिनट रहेगी। जब तक 2 मिनट का "ऑल क्लियर" सायरन नहीं बज जाता, तब तक किसी को भी लाइट चालू करने की अनुमति नहीं होगी। इस दौरान प्रशासन हॉटलाइन, रेडियो कम्युनिकेशन और कंट्रोल रूम की वर्किंग को चेक करेगा। साथ ही पुलिस, मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड की क्विक रिस्पांस टीम का भी टेस्ट होगा। स्टूडेंट्स बनेंगे सुरक्षा के वॉलिंटियर्स जिला कलेक्टर ने विशेष रूप से NCC, NSS, स्काउट-गाइड और कॉलेज के स्टूडेंट्स को इस इवेंट में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहा है, ताकि वे भविष्य में किसी भी डिजास्टर के समय समाज की मदद कर सकें। कलक्टर ने साफ किया कि यह एक रूटीन प्रैक्टिस है, इसलिए लोग इसे किसी वास्तविक खतरे से जोड़कर न देखें। इन बातों का रखें खास ख्याल: प्रशासन का कहना है कि जैसलमेर जैसे स्ट्रैटेजिक लोकेशन वाले जिले के लिए ऐसी मॉक ड्रिल बहुत जरूरी है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन परफेक्ट रहे।