आगामी पंचायतीराज और नगर निकाय चुनावों से पहले जैसलमेर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग के निर्देश पर कराया गया ओबीसी वर्ग का सर्वे पूरा हो गया है। 'राजधारा' ऐप के माध्यम से घर-घर जाकर किए गए इस डिजिटल सर्वे में जिले के कुल 83,460 ओबीसी परिवारों का डेटा दर्ज किया गया है। नए आंकड़ों के सामने आने के बाद स्थानीय निकायों और पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण आबादी के अनुपात के आधार पर होने की संभावना है, जिससे चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है। 16 हजार से अधिक नए परिवार जुड़े आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अनुसार सर्वे में जिले के चारों उपखंड जैसलमेर, पोकरण, भणियाणा और फतेहगढ़ के साथ नगर परिषद और नगरपालिका क्षेत्रों को शामिल किया गया। सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 76,259 और शहरी क्षेत्रों में 7,201 ओबीसी परिवार दर्ज किए गए हैं। दोनों को मिलाकर कुल संख्या 83,460 होती है। पहले सरकारी अनुमानों में जिले में ओबीसी परिवारों की संख्या करीब 67 हजार मानी जा रही थी। नए डिजिटल सर्वे में यह आंकड़ा 83,460 तक पहुंच गया है, यानी अनुमानित संख्या की तुलना में लगभग 16,460 परिवार अधिक सामने आए हैं। मुस्लिम ओबीसी समुदाय की हिस्सेदारी भी बढ़ी स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिले के ओबीसी परिवारों में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी काफी अधिक है। उनके अनुसार कुल ओबीसी परिवारों में इनकी भागीदारी करीब 60 से 70 प्रतिशत के बीच हो सकती है। हालांकि इसका आधिकारिक वर्गवार आंकड़ा अभी जारी नहीं किया गया है। आबादी के आधार पर होगा आरक्षण अब तक नगर निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में सीटों का आरक्षण लॉटरी प्रणाली से होता था। इसके कारण कई बार ऐसे वार्ड भी ओबीसी के लिए आरक्षित हो जाते थे, जहां उनकी आबादी कम होती थी। नई व्यवस्था में जिन वार्डों या क्षेत्रों में ओबीसी आबादी अधिक होगी, उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना है। उदाहरण के तौर पर, यदि जैसलमेर नगर परिषद में 45 वार्ड हैं और ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत आरक्षण लागू होता है, तो 45 का 21 प्रतिशत 9.45 वार्ड होता है। यानी अंतिम संख्या राज्य सरकार की आरक्षण एवं राउंडिंग संबंधी अधिसूचना के अनुसार तय होगी, जबकि सामान्य गणना के आधार पर यह लगभग 9 से 10 वार्ड हो सकती है। इसलिए केवल 9 वार्ड आरक्षित होने का दावा अंतिम अधिसूचना से पहले निश्चित नहीं माना जा सकता। अफसर बोले- राज्य ओबीसी आयोग को भेजेंगे फाइनल रिपोर्ट विभाग के सहायक निदेशक राजेंद्र मेघवाल ने बताया- सर्वे निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर लिया गया है। अब सभी उपखंड अधिकारियों (एसडीएम) से यह प्रमाण-पत्र लिया जा रहा है कि उनके क्षेत्र का कोई भी पात्र परिवार सर्वे से वंचित नहीं रहा है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग को भेजी जाएगी।