जैसमेर के धोरों में वन्यजीवों का कुनबा कितना बढ़ा, इसका हिसाब-किताब 1 मई को पूर्णिमा की दूधिया रोशनी में होगा। राष्ट्रीय मरु उद्यान (DNP) और मरु विकास कार्यक्रम (DDP) के तहत जैसलमेर से बाड़मेर तक फैले वन्य क्षेत्रों में साल की सबसे बड़ी वन्यजीवों की गिनती शुक्रवार शाम 5 बजे से शुरू होने जा रही है। 24 घंटे तक चलने वाले इस अभियान में विभाग तकनीक के साथ परंपरागत तरीकों से भी गणना करेगी। DDP के DFO कुमार शुभम और DNP के DFO बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि इस बार वन्यजीवों की गिनती कुल 80 वाटर होल्स (पानी के गड्ढे) चिन्हित किए गए हैं। DNP रेंज में 52 पॉइंट्स डेजर्ट नेशनल पार्क के उप वन संरक्षक (DFO) ने बताया- जैसलमेर, म्याजलार, बाड़मेर और पोकरण रेंज के 52 पॉइंट्स पर ETF (इकोलॉजिकल टास्क फोर्स) के जवान और WII (भारतीय वन्यजीव संस्थान) के वैज्ञानिक मचानों पर डटे रहेंगे। जो 24 घंटे में नेशनल डेजर्ट एरिया में रह रहे वन्य जीवों की गणना करेंगे। DDP रेंज में 28 पॉइंट्स DDP के डीएफओ कुमार शुभम ने बताया- प्रत्येक वाटर होल पर एक तकनीकी कर्मचारी के साथ एक स्थानीय अनुभवी ग्रामीण गणक को तैनात किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी से वन्यजीवों की पदचाप और उनकी प्रजाति की पहचान सटीक हो सकेगी। पहली बार मुख्य लोकेशंस पर कैमरा ट्रैप्स लगाए गए हैं। रात के अंधेरे में भी अगर कोई जीव पानी पीने आएगा, तो सेंसर की मदद से उसकी फोटो ऑटोमैटिक क्लिक हो जाएगी। 4 वाटर होल्स पर पहली बार गणना वाटर होल्स पर चांदनी रात में जब जानवर पानी पीने आएंगे तब मौजूद वन कर्मी गिनती शुरू करेंगे। DDP रेंज एरिया डिविजन में 4 नए वाटर होल्स भी मिले हैं, जहां पहली बार आधिकारिक तौर पर गणना होगी। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच 264 कर्मचारी (जिनमें 64 विशेष DNP दस्ते के हैं) बिना सोए 24 घंटे मचानों पर मुस्तैद रहेंगे। पूर्णिमा में ही गणना क्यों वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा के इस महीने में पारा 45-48 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में वन्यजीवों को 24 घंटे में एक बार पानी पीने वाटर पॉइंट पर आना ही पड़ता है। पूर्णिमा की 'दूधिया रोशनी' में बिना कृत्रिम रोशनी के भी वन्यजीव स्पष्ट नजर आते हैं। बीते साल का रिकॉर्ड पिछले साल की गणना के आंकड़े बताते हैं कि जैसलमेर का ईको-सिस्टम पहले से मजबूत हो रहा है: DDP के डीएफओ कुमार शुभम ने बताया- “हमने DNP और DDP के कुल 80 पॉइंट्स पर घेराबंदी की है। WII के वैज्ञानिक और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से हम थार के वन्यजीवों का सटीक डेटाबेस तैयार करेंगे। 2 मई शाम 5 बजे तक एक-एक जीव की रिपोर्ट मुख्यालय पहुंच जाएगी।”