जैसलमेर में दो दिन की शांति के बाद सोमवार दोपहर से मौसम बदलने जा रहा है। मौसम विभाग ने नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि मंगलवार के लिए येलो अलर्ट रखा गया है। कृषि मौसम वैज्ञानिक अतुल गालव के अनुसार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू होगा, जिससे फसलों और जनजीवन पर असर पड़ सकता है। यह बदलाव अगले 48 घंटों तक जारी रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सोमवार दोपहर के बाद आसमान में बादलों की सघनता बढ़ेगी और मेघगर्जन के साथ तेज बारिश की शुरुआत होगी। इस दौरान वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने और ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना जताई गई है। जिले के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने के आसार हैं। यह मौसमी बदलाव मंगलवार को भी जारी रहेगा, जिससे जनजीवन और परिवहन पर व्यापक असर पड़ सकता है। किसानों के लिए ‘संकट’ की घड़ी अचानक बदले मौसम के मिजाज ने खरीफ की कटी फसलों को लेकर किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कृषि मौसम वैज्ञानिक अतुल गालव ने किसानों को चेतावनी देते हुए विशेष परामर्श जारी किया है। गालव ने कहा है कि बारिश, आंधी और विशेषकर ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसान बिना समय गंवाए खेतों में कटी पड़ी फसलों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करें या उन्हें तिरपाल आदि से अच्छी तरह ढक दें ताकि पानी और ओलों से बचाव हो सके। धूप और छांव के बीच तपिश से राहत इससे पूर्व रविवार को जिले का मौसम मिला-जुला रहा। दिन भर बादलों और सूर्य देवता के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहा। दोपहर के समय सूरज की तीखी तपिश ने राहगीरों और आमजन को बेहाल कर दिया, जिससे तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, शाम ढलने के साथ ही ठंडी हवाओं ने गर्मी से थोड़ी राहत जरूर दी। लेकिन अब सोमवार से शुरू होने वाला बारिश का दौर तापमान में एक बार फिर गिरावट लाएगा और वातावरण में ठंडक घुलेगी। प्रशासनिक सतर्कता और सावधानी मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी सावधानी बरतने की अपील की है। वज्रपात और अंधड़ के दौरान लोगों को पेड़ों के नीचे या कच्चे ढांचों के पास शरण न लेने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों को भी अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 48 घंटों तक जैसलमेर में झोंकेदार हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। यह बदलाव न केवल गर्मी से राहत देगा बल्कि अगर सुरक्षा न बरती गई तो कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा नुकसान भी खड़ा कर सकता है।