करीब 900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने रविवार रात करीब 2 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से उसे पकड़ा। वह थाईलैंड में शादी समारोह में शामिल होने के बाद भारत लौटा था। पूर्व मंत्री महेश जोशी और संजय बड़ाया को आज (सोमवार) एसीबी कोर्ट में पेश किया गया है। महेश जोशी की गिरफ्तारी 7 मई को हुई थी। ACB ने महेश जोशी की 3 दिन और संजय बड़ाया की 5 दिन की पुलिस रिमांड मांगी। महेश जोशी को कोर्ट ने ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा, जबकि संजय बड़ाया को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। इस दौरान संजय बड़ाया भावुक हो गए। कोर्ट में पेशी के दौरान बड़ाना की पत्नी नैना बड़ाया भी मौजूद थी। एसीबी कोर्ट में पेशी के दौरान महेश जोशी ने कहा- न्याय की जीत होगी। मेरे पास न तो कुछ छुपाने के लिए है, न ही बताने के लिए। महेश जोशी ने कहा- राजनीतिक दबाव में एसीबी काम कर रही है। एक ही मामले में बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किया, यह गलत है। जिस तरीके से इन्होंने संजय बढ़ाया के लिए लुकआउट सर्कुलर( LOC) जारी किया। जो व्यक्ति कोर्ट की परमिशन लेकर गया हो उसके लिए LOC जारी करना मैं समझता हूं, यह बिल्कुल गलत है। पूरे मामले में राजनीतिक दबाव में काम किया जा रहा है। घोटाले का मास्टरमाइंड है संजय आरोप है कि संजय बड़ाया घोटाले का मास्टरमाइंड है। वह दलाल (बिचौलिया) की भूमिका में रहा था। बताया जा रहा है कि बड़ाया थाईलैंड में हुई एक शादी में शामिल होकर भारत लौटा था। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही ब्यूरो इमीग्रेशन ने तुरंत एसीबी को सूचना दी। इसके बाद रात करीब 2 बजे एसीबी टीम ने उसे हिरासत में लिया था। उसके खिलाफ पहले से ही (10 मई) लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में 3 आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं। रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल का भी करीबी जांच एजेंसियों के अनुसार, संजय बड़ाया पूर्व मंत्री महेश जोशी के साथ ही रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल का भी करीबी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह पैसों के लेन-देन, ट्रांसफर-पोस्टिंग, नए लोगों को जोड़ने और टेंडरों में कथित गड़बड़ियों के काम में सक्रिय भूमिका निभाता था। इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी करता था बड़ाया जयपुर के बनीपार्क क्षेत्र का रहने वाला है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसे 16 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया था, जबकि 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से उसे जमानत मिली थी। जांच में सामने आया कि वह 2022 तक एक इंश्योरेंस कंपनी में करीब 7 लाख रुपए सालाना वेतन पर नौकरी करता था, लेकिन जेजेएम घोटाले के कुछ ही समय में करोड़पति बन गया। फर्जी दस्तावेजों से जेडीए की जमीन पर कब्जे का भी आरोप ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि उसने ‘मैसर्स चमत्कारेश्वर बिल्डर्स एंड डेवलपर’ नाम से कंपनी बनाई थी। इसमें उसकी पत्नी नैना बड़ाया भी पार्टनर थी। इस कंपनी के जरिए जयपुर में करोड़ों रुपए का कारोबार किया गया। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए जेडीए की जमीनों पर कब्जे के प्रयास भी सामने आए। 7 मई को पूर्व मंत्री को पकड़ा था पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को एसीबी ने 7 मई को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें 11 मई तक एसीबी रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें एसीबी कोर्ट में पेश किया था। इससे पहले 9 अप्रैल को तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। फिलहाल वह जेल में हैं। दोष सिद्ध हुआ तो होगी 10 साल की जेल एसीबी की प्रारंभिक जांच और चार्जशीट के अनुसार, यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होते हैं तो महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल समेत अन्य आरोपियों को अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है। --- यह खबर भी पढ़िए… ‘पानी के पैसे की चोरी, महेश जोशी जैसा हश्र होगा’, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले-ठेकेदार चाहे किसी का खास हो, मैं नहीं छोडूंगा जो पानी के पैसे की चोरी करेगा, उसका वैसा ही हश्र होगा जैसा महेश जोशी का हुआ है। चाहे वह ठेकेदार किसी का कितना भी खास हो…मैं उसे नही छोडूंगा। ये कहना है केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का। दरअसल, शेखावत ने जैसलमेर के फलसूंड में रविवार रात को रात्रि चौपाल की थी। पूरी खबर पढ़ें… 900 करोड़ के घोटाला में पूर्व मंत्री से 8 घंटे पूछताछ, 40 से अधिक सवाल पूछे, नहीं दिए संतोषजनक जवाब
जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले मामले में शनिवार को पूर्व मंत्री महेश जोशी से करीब 8 घंटे पूछताछ हुई। पूछताछ में पूर्व मंत्री से 40 से अधिक सवाल पूछे गए। एसीबी की ओर से रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ जारी है। (पूरी खबर पढ़ें)