जालोर में 11 सूत्री मांगों को लेकर आंगनबाड़ी महिला कार्मिकों का धरना शुक्रवार को 17वें दिन भी जारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी की गई है। महिलाओं ने कहा कि प्रशासन काम पर लौटने के लिए दबाव बना रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जशोदा ने बताया कि मानदेय बढ़ाने सहित अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर आंगनबाड़ी महिला कार्मिकों का धरना जारी है। महिलाओं ने कहा कि तीन दिनों से सभी केंद्रों पर तालाबंदी की गई है और महिलाएं हड़ताल पर हैं, इसलिए कोई भी काम पर नहीं जा रही है। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि महिलाओं ने विरोध करते हुए कहा कि जब तक समाधान नहीं होगा, तब तक धरना जारी रहेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जशोदा ने कहा कि एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार अपने आंगनबाड़ी कार्मिकों को 13 से 15 हजार रुपए तक मानदेय दे रही है, वहीं राजस्थान में महज 6 से 10 हजार रुपए का अल्प मानदेय दिया जा रहा है। यह मामूली मानदेय भी लंबे समय से बकाया चल रहा है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 11 सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्मिकों को नियमित कर्मचारी बनाने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक कोर्ट के निर्णयानुसार न्यूनतम मजदूरी 20,000 से 25,000 रुपए प्रति माह की जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग में ठेका प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही कुम्हेर परियोजना के ठेका कार्यकाल का ऑडिट कराया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जनगणना, सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-विभागीय कार्य करवाना तुरंत बंद किया जाए। नैपकिन का ऑफलाइन वितरण ही कार्मिकों से कराया जाए। बजट घोषणा 2025–26 के अनुसार सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्मिकों को ग्रेच्युटी भुगतान करने का ऐलान किया गया था, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। सरकार तुरंत यह आदेश जारी करे। ये खबर भी पढ़ें… जालोर में आंगनबाड़ी केंद्रों की तालाबंदी करने की चेतावनी:कार्यकर्ताओं ने रैली निकाल कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया; धरने पर बैठीं