राजस्थान के जालोर जिला मुख्यालय पर विरासत और गांधीवादी परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। जालोर चरखा संघ द्वारा आयोजित साप्ताहिक चरखा अभ्यास शिविर का रविवार को पच्चीसवां संस्करण शाह पुंजाजी गेनाजी स्टेडियम में संपन्न हुआ। संघ के संयोजक विनय व्यास ने बताया कि यह अभियान 2 नवंबर 2025 से लगातार जारी है। हर रविवार सुबह 7 से 9 बजे तक होने वाले इस दो घंटे के सत्र का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सूत कातने की कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और गांधीवादी विचारधारा को जन-जन तक प्रसारित करना है। खादी को बढ़ावा देना उद्देश्य मुख्य प्रशिक्षक और गांधीवादी विचारक जितेन्द्र कसाना द्वारा प्रतिभागियों को विशेष रूप से 'पेटी-चरखा' चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस चरखे को 1940 के दशक में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में डिजाइन किया था। प्रशिक्षण के दौरान किसान-चरखा, अम्बर-चरखा और बुक-चरखा जैसे विभिन्न प्रारूपों की जानकारी भी दी जा रही है। 1925 में गांधी जी द्वारा स्थापित 'अखिल भारत चरखा संघ' की परंपरा से प्रेरित यह मंच पूरी तरह से गैर-राजनैतिक है। इसमें किसी भी सरकारी, निजी या सामाजिक संगठन से जुड़ा व्यक्ति शामिल हो सकता है। जालोर चरखा संघ की यह पहल स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का नया अध्याय लिख रही है।