श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान जसोल में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंगला आरती से ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण स्थित राणीसा भटियाणीसा, बायोसा, सवाई सिंह , लाल बन्ना सा, खेतला और काला गौरा भैरूजी के मंदिरों में दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस शुभ अवसर पर छप्पन भोग का विशेष आयोजन किया गया। इसका लाभ फलौदी निवासी छोटमल सावणा के बेटे विकास सावणा ने लिया। उन्होंने मंदिर प्रांगण के सभी मंदिरों में छप्पन भोग अर्पित कर श्रद्धापूर्वक प्रसाद का वितरण किया। कन्याओं का पूजन किया कार्यक्रम के अंतर्गत जसोल सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया, जिससे वातावरण में श्रद्धा और सामाजिक समरसता का भाव रहा। इस अवसर पर संस्थान समिति सदस्य और प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल भी उपस्थित रहे। ‘भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन और संस्कार का आधार’ हरिशचंद्र सिंह जसोल ने उपस्थित नारी शक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन और संस्कार का आधार माना गया है। उन्होंने जोर दिया कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सक्रिय सहभागिता मिलना आवश्यक है, तभी एक सशक्त और संतुलित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर बात कहा कि महिला सशक्तिकरण से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संतुलन और संवेदनशीलता का विकास होता है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास के कार्यों को नई दिशा मिलती है। कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े विषय पर बात करते हुए कहा कि ऐसे प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक अवसर प्राप्त होते हैं। इससे उनकी सहभागिता सुदृढ़ होती है और समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं को समुचित महत्व मिलता है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण समाज की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक सोच के साथ योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी से एक ऐसे समाज के निर्माण का आह्वान किया, जहां महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर प्राप्त हों तथा वे आत्मविश्वास के साथ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।