पूर्व मंत्री और बीजेपी बहरोड़ के विधायक डॉ जसवंत यादव लंबे समय से बीमार हैं। जयपुर के हॉस्पिटल में भर्ती होने के कारण पहली बार ऐसा हो रहा है कि जसवंत यादव पंचायती राज चुनाव से दूर हैं। वहीं, पिछले 30 साल में जिला प्रमुख बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रह चुकी है। डॉ जसवंत यादव ऐसे नेता रहें, जिनको बीजेपी का प्रत्याशी पसंद नहीं आया तो कांग्रेस का जिला प्रमुख बना देते थे। 30 साल में पहली बार डॉ जसवंत सक्रिय नहीं डॉ जसवंत यादव पिछले करीब 30 साल से पंचायती राज चुनावों में एक्टिव रहे हैं। खुद भी जिला प्रमुख रह चुके हैं। पत्नी किरण यादव को भी जिला प्रमुख बनाया था। कांग्रेस के बड़े नेता और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी डॉ जसवंत ने जिला प्रमुख बनाया था। रेखा राजू यादव को तब जिला प्रमुख बना दिया था, जब कांग्रेस के पार्षद भी कम जीतकर आए थे। तीन जिलों की राजनीति बदल जाएगी पहले डॉ जसवंत यादव जैसा नेता पूरे अलवर जिले की राजनीति को तय करते थे। लेकिन अलवर से अलग होकर बने खैरथल-तिजारा जिले में नए नेता आगे आने लग गए हैं। इस बार के चुनाव के बाद पंचायत चुनाव में नए चेहरे आगे निकलना शुरू हो जाएंगे। आगे जिला प्रमुख बनने के बाद नए नेताओं का दबदबा माना जाना शुरू होगा। अब तक पंचायत चुनाव में डॉ जसवंत का नाम ही चलता रहा है। अब सरस डेयरी के जरिए भी नए नेता को मैदान में उतारा गया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव नए चेहरों को आगे लेकर आ सकते हैं। खैरथल-तिजारा जिला नेताओं का अखाड़ा वहीं, दूसरी तरफ पंचायत चुनाव में खैरथल-तिजारा जिला नेताओं का अखाड़ा बन गया है। इस बार खैरथल-तिजारा जिले का पहला जिला प्रमुख बनेगा। इस पर बड़े नेताओं की नजर है। माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जिसे तय करेंगे, वही पार्टी का चेहरा होगा। लेकिन जिला प्रमुख की दावेदारी करने वाले नए व पुराने कई चेहरे हैं। इनमें पूर्व विधायक रामहेत यादव के बेटे सतीश यादव, राजस्थान विश्विवद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रहे पवन यादव, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से जुड़े युवा नेता इंद्र यादव सहित कई अन्य चेहरे हैं। कांग्रेस के जिला प्रमुख के प्रबल दावेदारों में बड़े नाम नहीं हैं। यहां विधायक दीपचंद खैरिया, विधायक ललित यादव, पूर्व प्रत्याशी इमरान, जिलाध्यक्ष बलराम यादव सब मिलकर आपस में किसी चेहरे को लेकर आएंगे। पुराने दिग्गजों में पूर्व मंत्री हेम सिंह भी नहीं पुराने दिग्गज नेताओं में पूर्व मंत्री हेम सिंह भड़ाना भी नहीं हैं। उनके निधन के बाद थानागाजी क्षेत्र में प्रभाव कम हुआ है। पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा का विधानसभा क्षेत्र बानसूर है। जो अलवर जिले से बाहर हो चुका है। उनका क्षेत्र कोटपूतली बहरोड़ में शामिल हो गया। इसलिए उनका हस्तक्षेत्र पंचायत चुनावों में अलवर व खैरथल-तिजारा में नहीं के बराबर है। अब खैरथल-तिजारा जिले में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव सबसे बड़े नेता हैं। तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ दूसरे नंबर पर कहे जा सकते हैं। बाकी बीजेपी के अन्य नेता अपने-अपने तरीके से राजनीति कर रहे हैं।