झालावाड़ में सर्दी का मौसम खत्म होते ही गर्मी की शुरुआत के साथ पलाश के फूलों ने अपनी केसरिया छटा बिखेरनी शुरू कर दी है। जंगलों और शहर से बाहर के इलाकों में खिले ये फूल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ा रहे हैं, बल्कि आयुर्वेद में भी इनका विशेष महत्व है। पलाश, जिसे टेसू के नाम से भी जाना जाता है, अपने आकर्षक रंग के कारण दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींचता है। सड़क किनारे और वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इसके पेड़ पाए जाते हैं, जिनकी खूबसूरती इन दिनों देखते ही बनती है। कई महत्वपूर्ण औषधीय गुण मौजूद आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, पलाश के फूलों में कई महत्वपूर्ण औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इनमें सूजन और दर्द को कम करने वाले विरोधी भड़काऊ तत्व पाए जाते हैं। साथ ही, इनमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जो शरीर को संक्रमण और ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक सिद्ध होते हैं। बीपी को कंट्रोल करने में भी मददगार विशेषज्ञों का कहना है कि पलाश के फूल रक्तचाप (बीपी) को नियंत्रित करने में भी मददगार माने जाते हैं। आयुर्वेद में इनका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं जैसे अपच, गैस, पेट दर्द और बुखार के उपचार के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, ये सूजन और दर्द में राहत प्रदान करते हैं। नियमानुसार उपयोग करने पर यह फूल डायबिटीज, पाइल्स और त्वचा रोगों में भी सहायक हो सकता है। ऐसे करें उपयोग पलाश के फूलों का उपयोग फूलों की चाय पीने से पेट की समस्याओं और बुखार में राहत मिलती है। वही काढ़ा बनाकर सेवन करने से सूजन और दर्द में फायदा होता है। जबकि फूलों का पाउडर बनाकर लेने से बीपी नियंत्रण में मदद मिलती है। इसके पाउडर में गुलाबजल और शहद मिलाकर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं में आराम मिल सकता है। कई औषधियों में होता उपयोग हालांकि आयुर्वेद विभाग के डॉ. रिकेश यादवेंद्र ने बताया कि पलाश के फूलों का उपयोग कई औषधियों में किया जाता है और विभाग में भी इसकी सप्लाई होती है। उन्होंने सलाह दी कि इसका सेवन या उपयोग हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गर्मी के मौसम में जहां पलाश के फूल प्रकृति की सुंदरता को निखार रहे हैं, वहीं अपने औषधीय गुणों के कारण लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी साबित हो रहे हैं।