झालावाड़ में पर्यटन विकास समिति ने बुधवार को भवानी नाट्यशाला के 105वें स्थापना दिवस से पहले एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर नाट्यशाला के निर्माता पूर्व महाराज राणा भवानीसिंह की जयराज पार्क स्थित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। समिति संयोजक ओम पाठक ने इस अवसर पर कहा कि पूर्व महाराज राणा भवानीसिंह कला और साहित्य के महान संरक्षक थे। वे एक विद्वान शासक थे। पाठक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहर के ऐतिहासिक पार्क, जैसे जयराज पार्क और इन्द्रजीत पार्क, वर्तमान में दुर्दशा का शिकार हैं। उन्होंने बताया कि भवानी क्लब का अस्तित्व समाप्त कर उसे भोजनशाला में बदल दिया गया है और क्लब का पुराना सामान कमरों में बंद कर दिया गया है। उन्होंने इन पार्कों और क्लब को पुनः स्थापित करने की मांग की, ताकि धरोहरों की पहचान बनी रहे और नई पीढ़ी उनके महत्व को समझ सके। धरोहरों का संरक्षण बहुत जरूरी इतिहासकार ललित शर्मा ने कहा कि पूर्व महाराज राणा भवानीसिंह द्वारा निर्मित धरोहरों के महत्व को पर्यटन वैभव के रूप में देश भर में प्रसारित करने की आवश्यकता है। उन्होंने इन धरोहरों के संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। समिति सदस्य डॉ. नन्दसिंह राठौड़ ने कहा कि राज्यकालीन सभी धरोहरों की देखरेख के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐतिहासिक धरोहरों की नई पीढ़ी को होनी चाहिए जानकारी एक अन्य समिति सदस्य नफीस शेख ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपने जिले की ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इस पुष्पांजलि कार्यक्रम में सूरजकरण नागर, ठाकुर मंजीत सिंह कुशवाह, जयदीप सिंह झाला, डॉ. अलीम बेग, श्याम खटाणा, सत्यनारायण सुमन, भूपेन्द्र अग्रवाल, सुहास शर्मा, कन्हैयालाल कश्यप, अजय शर्मा, कन्हैयालाल और पदम गौड़ सहित कई अन्य लोगों ने भी अपने विचार साझा किए। अंत में, फोटोग्राफर एसोसिएशन के सचिव जितेंद्र गौड़ ने आभार व्यक्त किया।