आजकल की बदलती लाइफस्टाइल में उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त और सोचने-समझने की शक्ति से जुड़ी दिक्कतें सामने आ रही हैं। अल्जाइमर बीमारी का सही कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्र, आनुवंशिकता, माहौल और लाइफस्टाइल जैसे कई कारण इसमें शामिल हो सकते हैं। 65 साल से ज्यादा उम्र में इसका खतरा बढ़ता है, लेकिन सिर्फ उम्र को ही इसका कारण नहीं माना जाता। दिमाग को एक्टिव रखने वाले तरीके अपनाएं आज सोमवार को विश्व अल्जाइमर दिवस है। झालावाड़ अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि गुप्ता ने बताया कि 40 साल की उम्र से ही याददाश्त को अच्छा रखने वाली आदतों पर ध्यान देना चाहिए। जानकारी को सही तरीके से पढ़ना, दोहराना और प्रैक्टिस करना याद रखने में मदद कर सकता है। कविता, गीत, चुटकुले और पहेलियों जैसे तरीकों से भी दिमाग को एक्टिव रखा जा सकता है। इसके साथ ही सामाजिक कामों में हिस्सा लेना और दिमागी तौर पर एक्टिव रहना भी फायदेमंद हो सकता है। शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में हाल की घटनाएं या तारीखें भूलना, एक ही सवाल बार-बार पूछना और चीजों को गलत जगह पर रख देना शामिल है। बातचीत के दौरान आम चीजों या जाने-पहचाने लोगों के नाम याद करने में दिक्कत भी एक लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, प्लान बनाने, आम दिक्कतें सुलझाने या मासिक बिल जैसे जाने-पहचाने काम करने में मुश्किल, तारीख-समय या जगह को लेकर भ्रम और मूड में बदलाव भी शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। डॉ. गुप्ता के मुताबिक, डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति से ऐसे सीधे सवाल नहीं पूछने चाहिए, जिनमें उसे हाल की घटनाएं याद करने का दबाव महसूस हो। इसके बजाय, उसे हिंट देकर या आराम से बात करनी चाहिए। व्यक्ति क्या कहना चाहता है, उसे समझने की कोशिश करें। अगर उसकी बात असलियत से मेल नहीं खाती, तो उससे बहस करने या बार-बार ठीक करने के बजाय उसकी भावनाओं को समझना जरूरी है।